छेड़खानी के विरोध में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में शुरू हुआ छात्राओं का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है. शनिवार रात को हुए छात्राओं पर  लाठीचार्ज के विरोध में आज बीएचयू के छात्रों ने एक शांति मार्च निकालने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने इसे रोक लिया.

उग्र आंदोलन और छात्रों के भड़कने के बाद वाराणसी के सभी डिग्री कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. इसी बीच खबर है कि छात्राओं के एमएमवी व त्रिवेणी तथा छात्रों के ब्रोचा हॉस्टल को जबरदस्ती खाली कराया जा रहा है. इसके अलावा एक बार फिर से संवेदनशील बिड़ला हॉस्टल में लाठीचार्ज की तैयारी की जा रही है. वहीँ दूसरी ओर अपने एक साथी को छुड़ाने के लिए छात्रों ने लंका थाना घेर हुआ है.

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ध्यान रहे बीएचयू में पढ़ने वाली लड़कियां कैंपस में हो रही छेड़छाड़ की वारदातों के खिलाफ दो दिनों से धरने पर बैठी थीं. इनकी मांग थी कि वाइस चांसलर वहां आकर आकर उनकी परेशानियां सुनें और उनका समाधान निकालें. लेकिन वाइस चांसलर ने उनकी बात सुनना भी जरुरी नहीं समझा.

एडीएम सिटी व एसपी सिटी ने कुलपति के समक्ष प्रस्ताव रखा कि वो चलकर गेट पर छात्राओं से मिल लें मगर वह नहीं गए. जिसकी वजह से इतना बड़ा बवाल हुआ. ये पूरी घटना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वाराणसी दौरे के दौरान हुई है. इस पूरी घटना को लेकर कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि बड़ी संख्या में बाहर के लोगों ने इस आंदोलन को हवा दी है.

त्रिपाठी ने कहा कि वे छात्र-छात्राओं की बात समझते हैं, सुरक्षा और बचाव दोनों ही बहुत महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में सुरक्षा के दृष्टिकोण से कई पहलुओं पर ध्यान देना होगा. कुलपति ने यह भी कहा कि शुरुआत में छात्रों को विश्वविद्यालय से शिकायत थी, लेकिन अब मामला कुछ और हो चुका है.

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