विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती (रह.) की दरगाह के दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने केंद्र की मोदी सरकार से पुरे देश में गौहत्या और गौमांस की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की हैं.

उन्होंने कहा कि उनके पूर्वज ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती ने इस देश की संस्कृति को इस्लाम की नियमों साथ अपना कर मुल्क में अमन शान्ति और मानव सेवा के लिये जीवन सर्मपित किया. उन्होंने कहा,  गौवंश की प्रजातियों के मंास को लेकर मुल्क में सैंकड़ों साल से जिस गंगा जमुनी तहजीब से हिन्दू और मुसलमानों के मध्य मोहब्बत और भाईचारे का माहौल परंम्परागत रूप से स्थापित था, उसे ठेस पहुंची है. उसी सदभावना की विरासत के पुनस्र्थापन की फिर से जरूरत है. इसके लिये मुसलमानों को विवाद की जड़ को ही खत्म करने की पहल करते हुऐ गौवंश :बीफ: के मांस के सेवन को त्याग देना चाहिये.

दरगाह दीवान ने कहा, गौवध और इनके मांस की बिक्री पर रोक लगने से इस मुल्की मजहबी रवादारी मोहब्बत और सदभावना फिर से उसी तरह कायम हो सकेगी जैसी सैंकड़ों सालों से रही है. उन्होंने गुजरात सरकार द्वारा गुजरात विधानसभा में पशु संरक्षण संशोधन अधिनियम 2011 पारित करने के फैसले की सराहना की. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को गौवंश की हत्या पर पाबंदी लगाकर गौहत्या करने वालों को उम्रकैद की सजा का प्रावधान करना चाहिए और गाय को राष्ट्रीय पशु की घोषित कर देना चाहिए.

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