भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक के कनकपुरा में प्रस्तावित 114 फीट ऊंची ईसा मसीह की प्रतिमा को लेकर मोर्चा खोल दिया है। जिसके चलते राज्य सरकार को इसका काम रोकना पड़ा।

हाल में करीब एक हजार लोगों ने हाथों में भगवा झंडा लेकर कनकपुरा में विरोध प्रदर्शन किया। बता दें कि कर्नाटक की पिछली कांग्रेस सरकार ने ईसा मसीह की 114 फुट लंबी मूर्ति बनवाने के लिए 10 एकड़ ज़मीन देने का प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

आरएसएस के एक शीर्ष अधिकारी प्रभाकर भट ने पत्रकारों से कहा, “हम इसके निर्माण को रोकना चाहते हैं, चूंकि यह सांप्रदायिक सद्भाव की भावना के खिलाफ है और इससे धर्म परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है, जो बड़े पैमाने पर ईसाई मिशनरी करते हैं।”

दिलचस्प बात ये है कि ये वही भट्ट हैं जिन पर उनके साथियों समेत हाल ही में केस दर्ज किया गया था। उनके खिलाफ पुलिस ने एक स्कूल में बाबरी मस्जिद विध्वंस का छात्रों से मंचन करवाने का आरोप लगाया था।

कर्नाटक की साढ़े छह करोड़ की आबादी में ईसाई एक फीसदी से भी कम है। हालांकि इस प्रतिमा विवाद के सामने आने के बाद कर्नाटक सरकार पर भेदभाव के आरोप लग रहे हैं। राज्य सरकार टीपू सुल्तान की जयंती पर भी बैन लगा चुकी है। मैसूर के राजा टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ कई लड़ाइयां लड़ी थीं।

केंद्र में 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद से देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराधों में वृद्धि दर्ज की गई और धार्मिक आजादी भी सिकुड़ने के दावे किए जा रहे हैं। पिछले साल ही अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग ने कहा था कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता में गिरावट देखी जा रही है। हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था।

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