इस्लामिक सल्तनत के तहत मुग़ल शासन में बनी विश्व प्रसिद्ध इमारत ताजमहल को लेकर उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने स्वामित्व को लेकर जो दावा जताया था. अब उसे वापस  लेने का फैसला किया है.

मंगलवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि वह ताजमहल के स्वामित्व का दावा नहीं करेगा. बता दे कि पहले बोर्ड ने यह कर दावा किया था कि मुगल बादशाह शाहजहां ने ताजमहल का मालिकाना हक़ लिखित में दे दिया था.

ऐसे में अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील ए.डी.एन राव को निर्देश लेने के लिए कहते हुए प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम.खानविलकर व न्यायमूर्ति डी.वाई.चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि बोर्ड द्वारा एक बार स्मारक पर अपने अधिकार का दावा करने के बाद इस मुद्दे पर निर्णय करना होगा.

पीठ ने कहा, “आप ने एक बार स्मारक को यदि वक्फ की संपत्ति के रूप में पंजीकृत करा दिया तो आपका बयान कि आप दावा नहीं करेंगे, मदद नहीं करेगा.” अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को करने का निर्देश दिया.

इससे पहले की सुनवाई में 11 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने भारतीय पुरातत्व विभाग की 2010 में फाइल अपील की सुनवाई करते हुए वक्फ बोर्ड से मुगल शासक शाहजहां के हस्ताक्षर वाला दस्तावेज अपने दावे के समर्थन में पेश करने को कहा था.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा-वक्फ बोर्ड के दावे पर कौन विश्वास करेगा, ऐसी चीजें कोर्ट का समय बर्बाद करने के लिए नहीं होनी चाहिए.

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