उत्तर प्रदेश में दलितों का उत्पीड़न थमने का नाम नहीं के रहा है. अब बदायूं जिले में दलित उत्पीड़न का मामला सामने आया है. आजमपुर बिसौरिया गांव में एक दलित मजदूर को इसलिए पीटा गया क्योंकि उसने गेहूं काटने से मना कर दिया.

पीड़ित किसान सीताराम ने बताया कि गेहूं काटने से इनकार करने पर उस्की मूंछ नोंच दी गई. उसे पेड़ से बांधकर भी बुरी तरह पीटा गया. अपने साथ हुए अत्याचार की शिकायत जब पुलिस से की तो पुलिस ने भी शुरुआत में कोई कार्रवाई नहीं की.

घटना के करीब एक हफ्ते बाद सिटी एसपी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव के आदेश पर इस मामले में आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई. पीड़ित की शिकायत पर गांव के ठाकुर विजय सिंह, विक्रम सिंह, शैलेंद्र और पिंकू सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

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आपको बता दें कि दलित उत्पीड़न का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले बुन्देलखण्ड के हमीरपुर में भौंरा गांव में दबंगों ने चोरी का आरोप लगाकर दो दलित बच्चो को गंभीर यातनाएं दी.

भौंरा गांव में डीजे की मशीन चोरी करने के आरोप में दबंगों ने दलित किसान राम खिलावन के दो मासूम बच्चे रिशु अहिरवार (11) और विजय निषाद (9) को पकड़ लिया. दोनों बच्चों के साथ पहले मारपीट की. फिर दोनों मासूमों को नदी के पानी में डुबाया, कुँए में लटकाया, उनके शरीर में पेट्रोल डाला. तब भी मन नहीं भरा तो ब्लेड से दोनों बच्चों के प्राइवेट पार्ट सहित जिस्म में कई जगह वार कर लहू लुहान कर दिया.

पीड़ित बच्चों का पिता दोनों बच्चों को साथ लिए दर दर भटक रहा है पर दबंगों के रसूख के आगे पुलिस खामोश बैठी रही. मामले के तुल पकड़ने के बाद पुलिस अधीक्षक की फटकार पर पुलिस ने रामखिलावन अहिरवार की तहरीर पर लालमन निषाद,  छुटकू निषाद व छोटू निषाद के खिलाफ दलित उत्पीड़न अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है.