ashok

एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए संशोधन और आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाने को लेकर देश भर में दलित प्रदर्शन कर रहे है. जिसमे अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है.

ऐसे में अब अपर पुलिस अधीक्षक, पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय, डॉ. बीपी अशोक ने सोमवार को राष्ट्रपति को इस्तीफा भेजा है. राष्ट्रपति को भेजे पत्र में उन्होंने 7 मांगों को मानने या इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह किया है.  उन्होंने पत्र की एक प्रति पुलिस महानिदेशक को भी भेजी है.

उन्होंने पत्र में लिखा है, “इस परिस्थिति में मुझे बार-बार यही विचार आ रहा है कि अब नहीं तो कब, हम नहीं तो कौन.” डॉ. अशोक ने पत्र में लिखा है कि एससी-एसटी एक्ट को कमजोर किया जा रहा है. संसदीय लोकतंत्र को बचाया जाए. रूल ऑफ जज, रूल ऑफ पुलिस के स्थान पर रूल ऑफ लॉ का सम्मान किया जाए. महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व अभी तक नहीं दिया गया है.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

डॉ. अशोक ने आगे कहा, उच्च न्यायालयों में एससी, एसटी, ओबीसी व माइनॉरिटी की महिलाओं को अभी तक प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है. प्रमोशन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। श्रेणी 1 से श्रेणी 4 तक साक्षात्कार युवाओं में आक्रोश पैदा करते हैं. सभी साक्षात्कार खत्म किए जाएं. जाति के खिलाफ स्पष्ट कानून बनाया जाए.

साथ ही उन्होंने पत्र में आक्रोशित दलित युवकों से शांति की अपील भी की है. एएसपी अशोक बसपा से नजदीकियों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं. हालांकि बसपा शासन में एएसपी सिटी लखनऊ (पूर्वी) के रूप में तैनाती के दौरान पत्रकारों से अभद्रता पर उन्हें निलंबित भी किया गया था.