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कश्मीर में शहीद हुए राजस्थान के डीडवाना के निकट मावा गांव निवासी सूबेदार सत्तार खां को मंगलवार को अंतिम विदाई दी गई. हजारों लोगों की मौजूदगी में सैन्य उन्हें सम्मान के साथ सुपुर्दे खाक किया गया.

इससे पहले उन्हें सेना के जवानो ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. सूबेदार सत्तार खां गत 12 मई को कश्मीर में ड्यूटी के दौरान गोला-बारुद फटने से घायल हो गए थे. उन्हें हेलिकॉप्टर से दिल्ली लाया गया था. यहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.

सत्तार खां कश्मीर की गुरेज घाटी में 13 हजार 250 फीट की ऊंचाई पर तैनात थे. जो पाकिस्तान सीमा नियंत्रण रेखा पर शीर्ष चोटियों में से एक है. सेना की 13 ग्रेनेडियर्स के अब्दुल सत्तार खान 12 मई को पाकिस्तान की तरफ से हुई भारी बमबारी में बुरी तरह से झुलस गए थे. गोलियों से घायल और झुलसे खान ने बहादुरी का परिचय देते हुए टुकड़ी में अन्य लोगों को जलने और बुरी तरह जख्मी होने से बचाया था.

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50 फीसदी झुलसने के बावजूद हैलीकॉप्टर से रेस्क्यू होने तक ने दुश्मन को बार बार मुंह तोड़ जवाब देते रहे और अपने साथियों को बचाते रहे. उन्हें मौके से ही बुरी तरह जख्मी को हैलीकॉप्टर से श्रीनगर बेस हॉस्पिटल पहुंचाया. उसके बाद आर्मी अस्पताल दिल्ली में भर्ती कराया. 8 दिन जिंदगी और मौत से जूझते हुए खान ने 20 मई की रात को अंतिम सांस ली.

मंगलवार को सुबह विशेष वाहन से शहीद की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव मावा लाया गया. इसके साथ ही गांव में सन्नाटा छा गया. घर में शहीद की देह के पहुंचने पर शहीद अब्दुल सत्तार के परिजन उनकी पार्थिव देह से लिपटकर फफक पड़े. जबकि शहीद की पत्नी व बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल रहा. शहीद के पिता भी बेहद गमगीन हो गए। रिश्तेदारों ने शहीद के परिजनों को ढ़ांढस बंधाया. इसके बाद गांव में शहीद का जनाजा रवाना हुआ, जिसमें सैकड़ों लोगों ने शिरकत की.

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