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भवानीमंडी/झालावाड: जम्मू और कश्मीर के कठुआ जिले में आठ साल की मासूम बच्ची के साथ मंदिर में की गई दरिंदगी और हत्या के खिलाफ आज 20/04/2018 को बाद नमाज-ए-जुम्मा जामा मस्जिद से गुलाम-ए-अली कमिटी के तत्वधान में मुस्लिम समाज ने एक विरोध रैली निकाली। इस रैली में हजारों की तादाद में लोग शामिल हुए। हाथों में तख्तियां थामे हुए शांतिपूर्वक ये विरोध-प्रदर्शन मुख्य सड़क मार्ग होते हुए SDM कोर्ट पहुंचा। जहाँ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप राष्ट्रपति वेंकेया नायडू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, लोकसभा विपक्ष नेता गुलाम नबी आजाद, महिला बाल विकास मंत्री मेनका गांधी, मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित देश के संवेधानिक पदों पर विराजमानों को उप खंड मजिस्ट्रेट भवानीमंडी के माध्यम से ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस ज्ञापन में श्रीमान उप खंड मजिस्ट्रेट के जरिए कठुआ और उन्नाव रेप केस की 3 महीनों के भीतर फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले की सुनवाई करने, दोषियों को संविधान में संशोधन कर सरेआम आम फांसी देने, दोषियों का समर्थन करने वाले और जांच को प्रभावित करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, क्राइम ब्रांच को चार्जशीट दाखिल करने से रोकने वाले जम्मू बार एसोसिएशन और सबंधित वकीलों का तत्काल लाइसेंस निलंबित करने और दोनों पीड़िताओं को एक करोड़ रूपये का मुआवजा देने की मांग की गई।

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इस मौके पर गुलाम-ए-अली कमेटी अध्यक्ष जाफर अली ने कहा कि देश भर में बलात्कार और हत्याओं का तांता लगा हुआ है। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और वे एक के बाद एक जघन्य वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। बावजूद कठुआ और उन्नाव में अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय सरकार ने उन्हें बचाने का प्रयास किया। दोषियों के समर्थन में सत्तारूढ़ पार्टी के मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इतना ही नहीं सरकार और सत्तारूढ़ दल भाजपा से जुड़े लोग आपराधिक मामलों को सांप्रदायिक रंग देकर समाज को बांटने का प्रयास कर रहे हैं। जो निंदनीय है।

वहीँ मुस्लिम स्टूडेंट आर्गेनाईजेशन ऑफ़ इंडिया के जिला अध्यक्ष दिलशाद नूर ने कहा कि जम्मू के कठुआ और यूपी के उन्नाव की घटनाओं ने एक बार फिर से मानवता को शर्मसार कर दिया है। दिल्ली में हुये निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे जहां खोखले नजर आ रहे हैं। वही बलात्कार के आरोपियों को सूक्ष्म समर्थन भारतीय समाज पर कलंक साबित हो रहा है। आज से पहले समाज में कभी भी बलात्कारियों को समर्थन का मामला सामने नहीं आया लेकिन उक्त मामलों ने हमारी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। साथ ही रही सही कसर कठुआ कांड को धार्मिक चश्मे से देखने की प्रवृत्ति ने पूरी कर दी है। 8 साल की मासूम लड़की के कातिलों को समाज के एक वर्ग से हमदर्दी मिल रही है जो भारतीय संस्कृति और सभ्यता के लिए शर्म की बात है। जिसके दूरगामी परिणाम ज्यादा खतरनाक होंगे।

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इसके अलावा पोपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया के जिला अध्यक्ष, नियामत अली ने कहा कि बलात्कार और हत्याएं पहले भी होती थीं। लेकिन अपराधियों को किसी सरकार या राजनीतिक दल ने बचाने का खुल्लम-खुल्ला प्रयास पहले कभी नहीं किया। जो अब किया जा रहा है। ज्ञापन देने के दौरान शकील पठान, इरफ़ान अली, जुबेर अंसारी, जावेद अंसारी, शाहीद खान, रईस अंसारी, अख़लाक़ मंसूरी, आमीन खान, इमरान खान, इक़बाल मंसूरी, रब्बानी उपस्थित रहे।