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देशभर में पिछले दस महीनों में उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा के सबसे ज्यादा मामले सामने आये है. इसके अलावा हिरासत में मौत के मामलों में भी यूपी पहले स्थान पर है.

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने लोकसभा में बुधवार को बताया कि 2017 में देश में 822 सांप्रदायिक घटनाएं हुई. वर्ष 2016 में इस तरह की 703 और 2015 में 751 घटनाएं हुई थी. उत्तर प्रदेश में 195, कर्नाटक में 100, राजस्थान में 91, बिहार में 85, मध्य प्रदेश में 60 घटनाएं हुई.

नेशनल ह्यूमन राइट कमिशन (एनएचआरसी) के आंकड़ों के अनुसार, अहीर ने बताया कि आयोग ने 10 महीनों में हिरासती मौतों के 1,680 मामले दर्ज किए. इसमें न्यायिक हिरासत और पुलिस हिरासत में हुई मौतों के मामले शामिल हैं. अहीर ने कहा कि इनमें 1,530 मौत न्यायिक हिरासत में हुईं जबकि 144 मौत पुलिस हिरासत में हुई है.

अहीर ने बताया कि न्यायिक हिरासत और पुलिस हिरासत में सबसे अधिक मौत 365 उत्तर प्रदेश में हुईं. इसके बाद पश्चिम बंगाल में 127, 118 पंजाब और महाराष्ट्र, 107 मध्य प्रदेश और बिहार में 102 लोगों की मौत हुईं. एनएचआरसी की रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान 19 मामले फर्जी मुठभेड़ के भी सामने आए. इनमें छह मामले में उत्तर प्रदेश में सामने आए.

एक सवाल के उत्तर में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अहीर ने राज्यसभा में बताया कि वर्ष 2014 और 2016 के बीच करीब 26,500 छात्रों ने आत्महत्या की. उन्होंने कहा कि 2016 में 9,474, वर्ष 2015 में 8,934 और 2014 में 8,068 छात्रों ने अपनी जान दी.

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