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दुनिया भर में बड़े पैमाने पर एक अभियान के तहत गैर-मुस्लिमों के बीच इस्लाम धर्म और मुस्लिमों के खिलाफ गलत प्रचार कर बेबुनियाद धारणाएं पैदा की जा रही है. जिसके चलते गैर-मुस्लिमों में मुस्लिमों और उनके धार्मिक स्थलों के प्रति कई भ्रम मोजूद है.

इन भ्रम को दूर करने के लिए मुंबई के मुंब्रा में मस्जिद परिचय कार्यक्रम शुरू किया गया. जिसके अंतर्गत हर रविवार को हिंदू धर्म के 10 लोगों को मस्जिद में बुलाया जाता है. इस दौरान उन्हें इस्लाम धर्म के बारे में बताया जाता है. साथ ही उनके मन में जो शंका होती है. उन्हें दूर किया जाता है.

जमात-ए-इस्लामी के एक सदस्य सैफ बताते हैं कि एक बार एक हिंदू ने उनसे कहा कि मस्जिदों के अंदर तलवारें रखी जाती हैं और एक कमरे में उन तलवारों से मारे जाने वालों के शव रखे जाते हैं. इस तरह की अफवाहों और भ्रम के बारे में सुनकर उन्हें झटका लगा और मस्जिद परिचय नाम का कार्यक्रम शुरू किया गया.

विक्रोली के रहनेवाले सेल्समैन डी. गुप्ता बताते हैं कि कैसे बचपन में उन्हें लगता था कि मस्जिद के अंदर शिवलिंग होता है, जिसकी मुस्लिम पूजा करते हैं. मस्जिद परिचय के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को फेसबुक पोस्ट के जरिये पता लगा. उसके बाद से कुछ लोग मस्जिद आने लगे तो कई लोग फेसबुक पर ही अपने सवालों के जवाब मांगते हैं.

बता दें कि इस तरह के कार्यकर्म की शुरुआत ब्रिटेन से हुई है. ब्रिटेन में 5 फरवरी को हर साल  ‘विजिट माई मोस्क’ का आयोजन किया जाता है. इस कार्यक्रम में 150 से ज्यादा मस्जिदें हिस्सा लेती है. इस आयोजन के जरिए ब्रिटिश नागरिकों, मुसलमानों और गैर-मुस्लिमों के बीच भाईचारा बढ़ाने का काम किया जाता है.

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