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लातूर। महाराष्ट्र के लेबर वेलफेयर मंत्री संभाजी पाटील निलंगेकर पर बैंकों का करीब 51 करोड़ का कर्ज माफ कर दिया गया है. ये कर्ज ऐसे समय में माफ़ किया गया है. जब राज्य के किसान कर्ज के चलते आत्महत्या कर रहे है.

यूनियन बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने मंत्री जी का 51 करोड़ रुपए ऋण माफ कर दिया है. हालांकि इस मामले में सीबीआई ने साजिश रचने और धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में मंत्री ने कहा कि लोन सेटलमेंट में बैकिंग नियमों का पूरा ख्याल रखा गया है. उन्होंने दावा किया कि लोन माफी में किसी भी प्रकार के नियम का उल्लंघन नहीं किया गया.

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संभाजी ने लगभग 40 करोड़ रु. का लोन लिया था. ब्याज सहित यह राशि 76 करोड़ के आसपास हो गई थी. बैंक द्वारा राहत देने के बाद अब लोन की रकम करीब 25 करोड़ रह गई है.

पाटील ने बैंक से कर्जा लेने के लिए अपने दादाजी की जमीन को बिना बताए गिरवी रखी थी. यह जानकारी जैसे ही बैंक को दी गई, बैंक कर्मचारियों ने पाटील के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया.

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ तीन हजार 27 पन्नों का आरोप पत्र लातूर कोर्ट में दाखिल किया. बताया जा रहा है कि सेटलमेंट के दौरान संभाजी ने अपनी एक पुरानी फैक्ट्री बैंक को दे दी थी.

दोनों बैंकों ने फैक्ट्री का मार्केट वैल्यू के आधार पर  संभाजी को राहत दी है. विपक्षी नेता अब फैक्ट्री की वैल्यूएशन पर भी सवाल उठा रहे है.

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