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कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चूका है. इसी बीच एक बड़ी धांधली का खुलासा हुआ है. जिसमे सामने आया कि राज्य के 18 लाख मुस्लिम मतदाताओं के वोटिंग लिस्ट से नाम गायब है.

दिल्ली की इस एनजीओ सेंटर फॉर रिसर्च एंड डिबेट्स इन डेवेलेपमेंट पॉलिसा का दावा है कि या तो इन मुस्लिम मतदाताओं का नाम ही हाल ही में जारी की गई मतदाता लिस्ट से गायब है. इसकी दो वजह हो सकती एक या तो उनके नाम ही लिस्ट में नहीं है या फिर उन्हे वोटर आईडी कार्ड जारी नहीं किया गया है.

जाने माने अर्थशास्त्री और जस्टिस सचर कमेटी के सदस्य अबूसालेह शरीफ ने बताया कि उन्होंने अब इसके खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है ताकि इस वोटर लिस्ट को सही किया जा सके.

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रिसर्च एसोसिएट और सीआरडीडीपी के सीओओ खालिद सैफुल्ला का कहना है कि उन्होंने 16 लाख ऐसी कर्नाटक विधानसभा के संसदीय क्षेत्र की पहचान की है जिसमे 1.28 लाख लोगों के नाम लिस्ट से गायब हैं. इस नंबर के आधार पर वह इस बात का अंदाजा लगा रहे हैं कि 224 संसदीय क्षेत्रों में इसकी संख्या 15 लाख से अधिक हो सकती है.

खालिद सैफुल्ला ने बताया कि 2011 की जनगणना के आधार पर हमे पता चला कि शिवाजी नगर संसदीय क्षेत्र में 4.3 फीसदी सिंगल हाउसहोल्ड हैं जबकि यहां कुल 18453 मुस्लिम घर हैं. लेकिन हमे पता चला है कि 8900 से अधिक घरों में सिर्फ एक ही वोटर कार्ड बना है, जोकि कुल मुस्लिम आबादी का 40 फीसदी है.

इस खुलासे के बाद अब एनजीओ ने एक वेबसाइट का निर्माण किया है जिसका नाम missingmuslimvoters.com है और इसका एंड्रॉयड ऐप भी बनाया गया है, जिससे कि मुस्लिम युवकों को एकजुट करके उन्हें शिक्षित किया जा सके.

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