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कर्नाटक में लिंगायत समुदाय हिन्दू धर्म से अब आधिकारिक तौर पर अलग हो चूका है. कर्नाटक सरकार ने लिंगायत समुदाय की बरसों पुरानी हिन्दू धर्म से अलग होने की मांग को मंजूरी दे दी है.

कर्नाटक सरकार ने नागभूषण कमेटी के सुझाव को स्वीकार कर लिया है. बता दें कि राज्य सरकार ने लिंगायतों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर विचार के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस नागामोहन दास की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था.

समिति ने लिंगायत समुदाय के लिए अलग धर्म के साथ अल्पसंख्यक दर्जे की सिफारिश की थी, जिसे कैबिनेट की तरफ से अब मंजूरी मिल गई. लिंगायत को कर्नाटक में फिलहाल ओबीसी का दर्जा मिला हुआ है.

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कर्नाटक में इस समुदाय की आबादी 10 से 17 फीसद है. लिंगायत का विधानसभा की तकरीबन 100 सीटों पर प्रभाव माना जाता है. जलसंसाधन मंत्री और लिंगायत नेता एमबी पाटिल ने कहा, ‘हमारी लड़ाई आज तार्किक परिणीति तक पहुंची है. हम हमेशा से ही इस बात पर कायम रहे हैं कि लिंगायत हिंदू धर्म नहीं से नहीं. आशा है कि केंद्र अब हमारी मांग मान लेगी.’

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा इसी समुदाय से आते हैं. शिवराज सिंह चौहान भी लिंगायत हैं.