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गुजरात के 2002 के सांप्रदायिक दंगों से जुड़े नरोदा पाटिया दंगे के मामले में गुजरात उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्री माया कोडनानी को बरी कर दिया है. उच्च न्यायालय ने कोडनानी समेत 17 लोगों को बाइज्ज़त बरी कर किया है.

कोर्ट के फैसले के बाद से ही नरोदा पटिया गाम में सन्नाटा पसरा रहा हुआ है. फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इंडियन एक्सप्रेस से 45 साल की शरीफाबेन शेख ने कहा कि आरोपी कोर्ट से छूट चुके हैं, वो अब आजाद रहेंगे, ऐसे में हम अब सुरक्षित कैसे रहेंगे? बता दें कि शरीफाबेन शेख ने दंगे में अपने 18 साल के बेटे शरीफ को खोया था.

उन्होंने कहा, आज भी बंद से हम सहम उठते हैं. साल 2002 में भी दंगे के दिन बंद बुलाया गया था.  अब जब कभी भी बंद बुलाया जाता है, तब हम लोग अपने रिश्तेदारों के यहां वाटवा चले जाते हैं. अब तो वे लोग (केस के आरोपी) कोर्ट से छूट चुके हैं, वो अब आजाद रहेंगे, ऐसे में हम अब सुरक्षित कैसे रहेंगे? शरीफाबेन दंगे की चश्मदीद गवाह हैं.

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उन्होंने कोर्ट में खौफनाक मंजर की गवाही भी दी थी, जब उनके बेटे को दंगाइयों ने जिंदा जला दिया था. वो कहती हैं कि उनका बेटा शरीफ तब 18 साल का था. दंगाइयों ने उनकी आंखों के सामने उसे जिंदा जला दिया था. वो कहती हैं, तब वो अपने पति से अलग तीन बच्चों के साथ नरोदा गाम में रहती थी. इस हादसे के बाद रिलीफ कैम्प में फिर से पति के साथ रहने लगी. उनके पति 47 साल के इकबाल भाई रिक्शा चलाते हैं.

शरीफाबेन कहती हैं कि उन्हें अब खुद और अपने बच्चों समेत पूरे परिवार की चिंता हो रही है. शरीफा ने कहा, “तब तो हमने कुछ नहीं किया था, तब वे लोग आए, हमारे घरों में गुसे और मारकर चल दिए। अब तो हमने उन सबको पहचाना और कोर्ट में उनके खिलाफ गवाही दी. ऐसे में अब हमारी रक्षा कौन करेगा?”

केस में दूसरी चश्मदीद इशरत जहां सैयद कहती हैं कि आठ साल में 2002 से 2010 के बीच 64 में से 32 आरोपी जब छूट गए तो और भी आरोपी छूट जाएंगे. माया कोडनानी से इसकी शुरुआत हुई है.

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