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गुजरात के भावनगर जिले में राज्य विद्युत कंपनी द्वारा अधिग्रहित भूमि के कब्जे के खिलाफ संघर्ष कर रहे करीब 5000 से अधिक किसानों ने अब सामूहिक रूप से आत्महत्या करने का फैसला किया है.

किसानों ने प्राधिकारियों को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है. किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे किसान संगठन के एक नेता ने मंगलवार (25 अप्रैल) को यह दावा किया. भावनगर के जिलाधिकारी हर्षद पटेल ने भी इसकी पुष्टि की है.

NBT में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय किसान और गुजरात खेदुत समाज के सदस्य नरेंद्र सिंह गोहिल ने कहा कि, ‘12 प्रभावित गांवों के किसान और उनके परिवार के सदस्यों सहित कुल 5,259 लोगों ने इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है, क्योंकि जिस जमीन पर वे खेती करते थे उसे राज्य सरकार और गुजरात पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (जीपीसीएल) ने जबर्दस्ती छीन लिया है.’

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गोहिल ने दावा किया कि इन किसानों और उनके रिश्तेदारों की ओर से हस्ताक्षरित पत्रों को भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गुजरात के मुख्यमंत्री को भेजा गया है. भावनगर के जिलाधिकारी हर्षद पटेल ने कहा कि किसानों ने यह पत्र कलेक्ट्रेट की रजिस्ट्री शाखा में डाले हैं जिसमें उन्होंने ‘इच्छा मृत्यु’ की अनुमति मांगी है.

किसानों ने पत्र में राज्य सरकार, जीपीसीएल पर जमीन खाली कराने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. किसानों ने दावा किया कि वे उस जमीन पर कई वर्षों से खेती कर रहे हैं. किसानों ने दावा किया कि जीपीसीएल जमीन अधिग्रहण करने के 20 वर्ष से अधिक समय बाद उस पर अधिकार करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि ऐसा कदम कानून के खिलाफ है.

बता देें कि जमीन पर अपने मालिकाना कब्जे को लेकर किसानों और पुलिस के बीच इसी साल 1 अप्रैल को झड़प हुई थी, जिसमें में 10 किसान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वहीं पुलिस ने 60 किसानों को हिरासत में लिया था।.

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