योगी सरकार लाख सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ कार्रवाई की बात करे लेकिन सरकार की कथनी और करनी में जमीन आसमान का फर्क है. जिसका उदहारण मुजफ्फर दंगे से जुड़े मामलों में देखा जा सकता है.दरअसल, योगी सरकार ने दंगाइयों पर दर्ज मुकदमें वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

2013 में मुजफ्फरनगर और शामली में हुए व्यापक दंगों में पांच सौ से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए थे. इन मुकदमों में हत्या के 13 और हत्या के प्रयास के 11 गंभीर मामले दर्ज हैं. 16 मुकदमे सेक्शन 153 ए यानी धार्मिक आधार पर दुश्मनी फैलाने के आरोप तथा दो मुकदमे सेक्शन 295 के दर्ज हैं, यानि किसी धर्म विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले भाषण देने का आरोप है.

बता दें कि भाजपा सांसद संजीव बालियान और विधायक उमेश मलिक के नेतृत्व में खाप पंचायतों के प्रतिनिधिमंडल ने पांच फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर उन्हें 179 केस की लिस्ट सौंपकर वापस कराने की मांग की थी. बालियान ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को जो सूची सौंपी उसमें सभी हिंदू थे.

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जिसके बाद 23 फरवरी को उत्तर प्रदेश के कानून विभाग ने विशेष सचिव राजेश सिंह के हवाले से मुजफ्फरनगर और शामली के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर 131 मुकदमों के संबंध में 13 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी.

2013 में हुए इस भीषण दंगों में 63 लोगों की मौत हुई थी और 50 हजार लोग विस्थापित हुए थे. मरने वालों में ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग थे. दंगो के मामले में मंत्री सुरेश राणा, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, भाजपा विधायक संगीत सोम, उमेश मलिक और अन्य के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो चूका है.