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रामगढ़: झारखंड की एक अदालत ने शुक्रवार को गोरक्षा से जुड़े एक हत्या के मामले में 11 ‘गो-रक्षकों’ को दोषी करार दिया है. इनमे स्थानीय बीजेपी नेता भी शामिल है.

रामगढ़ में बीते वर्ष 29 जून को गाड़ी में भरकर गोमांस ले जाने की अफवाह फैलाकर पीट-पीटकर की गई अलीमुद्दीन अंसारी की हत्या के मामले में स्थानीय भाजपा नेता नित्यानंद महतो, विक्की साव, सिकंदर राम, उत्तम राम, विक्रम प्रसाद, राजू कुमार, रोहित ठाकुर, और कपिल ठाकुर को कोर्ट ने धारा 147, 148, 427/149, 135/149, 302/149 के तहत दोषी करार दिया. इसमें तीनों मुख्य आरोपी को धारा 120 (बी) के तहत भी दोषी पाया गया है.

मारपीट

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अदालत ने मुख्य आरोपी को घटना का मुख्य साजिशकर्ता माना है. इसके अलावा सभी आरोपियों के खिलाफ मजमा लगाकर दंगा भड़काने, मारपीट, आगजनी और हत्या का दोषी करार दिया है. देश में ऐसा पहली बार हुआ है जब कथित गो-रक्षा के नाम पर हुई हिंसा से जुड़े किसी मामले में आरोपियों को सजा हुई है. सजा का ऐलान 20 मार्च को होगा.

बता दें कि हाईकोर्ट के आदेश पर इस मुक़दमे की सुनवाई के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया गया था. सरकार की तरफ़ से कोर्ट में इस मामले की पैरवी कर रहे अपर लोक अभियोजक सुशील कुमार शुक्ल ने बीबीसी को बताया, ”इस मामले में कम से कम आजीवन कारावास और अधिकतम फांसी की सज़ा का प्रावधान है. हमलोग अदालत से फांसी की सज़ा देने की अपील करेंगे, क्योंकि यह रेयरेस्ट ऑफ़ द रेयर केस है.”

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मालूम हो कि अलीमुद्दीन उर्फ असगर अंसारी नाम के मांस कारोबारी को रामगढ़ में 29 जून 2017 को गो-मांस ले जाने के संदेह में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार दिया गया था. जिस दिन असगर अंसारी पर यह हमला हुआ, उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गाय और गोरक्षा के नाम पर क़ानून हाथ में न लेने की अपील कर रहे थे.

इसकी अलावा मामले की सुनवाई के दौरान एक चश्मदीद की पत्नी की मौत सड़क दुर्घटना में रहस्यमय तरीके से हो गयी थी. वह मृतक अलीमुद्दीन की भाभी थीं. उन्हें एक अज्ञात मोटरसाइकिल ने कुचल दिया था.

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