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बिहार में एक के बाद एक कई सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं ने राज्य के हालात खराब कर दिए है. रामनवमी के मौके पर भागलपुर और औरंगाबाद में झड़प के बाद समस्तीपुर और मुंगेर में भी सांप्रदायिक हिंसा  की चपेट में है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक समस्तीपुर के रोशेरा में सोमवार को मूर्ति विसर्जन के जुलुस के दौरान चप्पल फेंके जाने का मामला सामने आया, जिसके अगले दिन हिंदूवादी संगठनों ने मस्जिदों और मुस्लिम समुदाय के लोगों को अपना निशाना बनाया. चप्पल फेंके जाने को लेकर पुलिस ने साफ़ इनकार किया है.

वहीँ ओरंगाबाद में मुस्लिम बहुल इलाके से बाइक रैली की निकालकर भड़काऊ नारे लगाए गए. जिसके बाद जुलुस पर पत्थरबाजी हुई. इस दौरान जमकर दुकानों को लूटा गया फिर उसमें आग लगा दी गई. इलाके में अब तीन दिन से धारा 144 लागू है.

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पटना से सटे नालन्दा जिले के मुख्यालय बिहार शरीफ में हर साल एक स्थानीय संत मणिराम के अखाड़ा में लंगोट चढ़ाने का आयोजन होता है. इस आयोजन में सरकारी महकमा भी हिस्सा लेता है. डीएम, एसपी से लेकर तकरीबन हर सरकारी कार्यालय की तरफ से लंगोट चढ़ाया जाता है.

छोटी-मोटी भीड़ जुलूस की शक्ल में शोभायात्रा निकालती है. लेकिन पिछले साल शहर में अचानक बजरंग दल प्रकट हो गया. बजरंग दल के कार्यकर्ता लाठी-डंडे और तलवार से लैस होकर शहरभर में नारे लगाने निकल पड़े. ऐसे में अब आए दिन समाज को ऐसी घटनाओं से दो-चार होना पड़ रहा है.

लगातार बढ़ती हुई हिंसाओं के कारण विधानसभा में जमकर हंगामा मचा. इस दौरान विपक्ष का हंगामा इतना जोरदार था कि कार्यवाही शुरू होने कुछ मिनटों बाद विधानसभा की कार्यवाही को दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया गया.