Thursday, December 9, 2021

सीवान कांड में नहीं मिली शहाबुद्दीन को राहत, हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा को रखा बरकरार

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सीवान के तेजाब कांड में शहाबुद्दीन को हाईकोर्ट की और से कोई राहत नहीं मिली है. हाई कोर्ट ने सिवान की विशेष अदालत के फैसले को जारी रखा है.

दरअसल, शहाबुद्दीन ने सिवान की विशेष अदालत के फैसले को पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. इसी मामले में फिलहाल शहाबुद्दीन दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं. पटना हाई कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई पूरी होने के बाद शहाबुद्दीन के अलावा राजकुमार साह, मुन्ना मियां और  शेख असलम की उम्रकैद की सजा भी बरकरार रखी है. हाईकोर्ट ने 30 जून 2017 को ही शहाबुद्दीन की सजा पर फैसला सुरक्षित कर लिया था.

सिवान की विशेष कोर्ट ने 11 दिसंबर 2015 को इस मामले में मोहम्मद शहाबुद्दीन, राजकुमार साह, मुन्ना मियां और शेख असलम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. करीब 13 साल पहले सिवान के कारोबारी चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदाबाबू के दो बेटों की हत्या तेजाब से नहलाकर कर दी गई थी. अदालत ने शहाबुद्दीन को धारा 302, 201, 364 और 120B का दोषी पाया और उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

क्या है मामला:

यह मामला 2004 का है. सीवान के कारोबारी चंदा बाबू जमीन विवाद के निपटारे के लिए पंचायत में थे. इस दौरान पंचायत में उनके साथ मारपीट हुई. जिसके चलते जन बचाने के लिए चंदा बाबू अपने घर आ गए. वे पत्नी और बेटों के साथ भागने लगे तभी उन पर बदमाशो ने हमला कर दिया. चंदा बाबू ने घर में रखे तेजाब को बदमाशों पर फेंककर अपनी और अपने परिवार की जान बचाई थी.

इस घटना के बाद उनके दोनों बेटों गिरीश राज उर्फ निक्कू और सतीश राज उर्फ सोनू को कुछ लोगों ने अगवा कर लिया था. इसके बाद सीवान शहर के चौराहे पर दोनों पर तेजाब डालकर उनकी हत्या कर दी गई थी. इस मामले में शहाबुद्दीन और उनके पुत्र ओसामा नामजद अभियुक्त हैं.

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