न्यायमूर्ति ए एम शफ़ीक और न्यायमूर्ति अशोक मेनन की एक खंडपीठ ने पांच दोषियों को बरी कर दिया है। इन लोगों को एनआईए अदालत के नवम्बर 2015 में अलग-अलग अवधि के कारावास की सजा सुनाई गई थी।

बरी किए गए लोगों में पी ए शादुल, अब्दुल रसिक, अंसार नदवी, निजामुद्दीन और शामी शामिल हैं। निचली अदालत ने दो आरोपियों को 14 वर्ष के कठोर कारावास और तीन अन्य को 12 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने उन्हें आईपीसी के विभिन्न प्रावधानों और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने मामले में 11 अन्य को बरी कर दिया था।

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एनआईए अदालत ने दो आरोपियों पर 60-60 हजार रुपये का जबकि तीन अन्य पर 55-55 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। इस मामले में, एर्नाकुलम जिले में बिनानीपुरम के एक उपनिरीक्षक को सूचना मिली थी कि आरोपी पनाईकुलम के एक हॉल में गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा हुए थे और भड़काऊ भाषण दिये गये।

अभियोजन पक्ष ने कहा था कि इडुक्की, कोट्टायम, त्रिशूर और पलक्कड़ जिलों से आरोपी ‘गुप्त’ बैठक के लिए पनाईकुलम में इकट्ठे हुए थे। राज्य पुलिस ने पहले मामले की जांच की थी और इसके बाद यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया गया जिसने दिसम्बर 2011 में एक आरोपपत्र दायर किया था।

जून 2014 में अदालत ने आरोप तय किए और जुलाई 2014 में सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने मार्च 2015 में दलीलें पूरी की थी।

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