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2002 में झाबुआ में फर्जी एनकाउंटर करने वाले आईपीएस अफसर धर्मेंद्र चौधरी को प्रमोशन देकर भोपाल ला आईजी बनाया गया है.

हाल ही में धर्मेंद्र चौधरी से राष्ट्रपति कार्यालय ने उन्हें बहादुरी के लिए दिए गए वीरता पदक को छिना था. राष्ट्रपति की तरफ से 2004 में धर्मेंद्र चौधरी को राष्ट्रपति ने वीरता पदक से सम्मानित किया था.

दरअसल, एनकाउंटर के करीब छह साल बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेकर जाँच की थी. आयोग की जांच में सामने आया था कि ये एनकाउंटर फर्जी था.

आप को बता दें कि धर्मेंद्र चौधरी के 2002 में झाबुआ में पदस्थ रहने के दौरान कुख्यात बदमाश लोहान को मारा गया था. इस एनकाउंटर को राज्य सरकार ने सही माना था.

हालांकि आयोग की रिपोर्ट पर राष्ट्रपति सचिवालय ने बीते साल 30 सितंबर को चौधरी से वीरता पदक वापस लेने की अधिसूचना जारी की थी. ऐसे में रतलाम डीआईजी के बाद धर्मेंद्र चौधरी को भोपाल की कमान सौंपे जाने पर सवाल खड़े होने लगे हैं.

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