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प्रेम प्रसंग को कथित लव जिहाद का नाम देकर साम्प्रदायिक उन्माद फैलाने वाले भगवा संगठनों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. जबलपुर हाई कोर्ट ने 26 वर्षीय युवती शिवा पारिहार उर्फ शमा खान को अपने मुस्लिम पति के साथ रहने की इजाजत दे दी है.

दमोह निवासी शमीम खान की बंदी प्रत्यक्षीकरण का निराकरण कर हाई कोर्ट ने पुलिस संरक्षण में गुरुवार को पति के घर भेजने के आदेश दे दिए. शमीम ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाकर माता-पिता द्वारा बंधक बनाकर रखी गई उसकी पत्नी शमा को मुक्त कराने की मांग की थी.

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गुरुवार को हाइकोर्ट के जस्टिस एसके सेठ व जस्टिस अंजलि पॉलो की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए लड़की की इच्छा पर शमीम के साथ भेजने का आदेश दिया. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि लड़की बालिग है और उसे उसके पति से अलग नही किया जा सकता.

बता दें कि कुछ दिन पहले शिवा परिहार नाम की 26 वर्षीय युवती ने शमीम नाम के 42 वर्षीय युवक से शादी कर ली थी. शिवा पारिहार ने अपना धर्म बदलकर इस्लाम स्वीकार कर लिया था और उसने अपना नाम भी शमा खान रख लिया था.

दोनों के निकाह के बाद जमकर बवाल मचा था. जिसके बाद  पुलिस संरक्षण में शमा को नारी निकेतन भेज दिया गया, लेकिन वहां से उसके माता-पिता जबरदस्ती उसे घर लेकर चले गए और बंधक बनाकर रखे हुए थे.