मुंबई: गौरक्षा और राष्ट्रगान के मुद्दें पर अपने सहयोगी दल बीजेपी पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने आज ‘भक्तों’ और आरएसएस से दोनों ही मुद्दों पर अपना रख स्पष्ट करने का आदेश दिया है.

गौरक्षा के मुद्दें पर शिवसेना ने कहा कि अभी तक यह कहा जाता है कि जो लोग गायों की रक्षा करते हैं वे राष्ट्रवादी है और जो बीफ खाते हैं वे देशद्रोही हैं लेकिन भाजपा शासित गोवा के मुख्यमंत्री ने कल कहा कि राज्य में बीफ पर कोई प्रतिबंध नहीं है.

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ध्यान रहे बीते दो दिन पहले गोमांस (बीफ) के क़ानूनी रूप से आयात में रुकावट डालने वाले गौरक्षकों को चेतावनी देते हुए गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि  ‘‘मैं यह देखूंगा कि अगर बीफ के कानूनी आयात में कोई बाधा पैदा करता है तो मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि उसे दंडित किया जाए.”

राष्ट्रगान के मुद्दें पर शिवसेना ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन लोगों के लिए झटका है जिन्होंने मोदी सरकार में यह रुख अपनाया था कि वंदे मातरम् गाने वाले लोग राष्ट्रवादी हैं और जो नहीं गाते हैं वे देशद्रोही हैं.’ राष्ट्रगान पर सरकार के रूख को कायरतापूर्ण बताते हुए इसमें कहा गया है कि राष्ट्रवाद की परिभाषा हर दिन बदल रही है.

सामना के सम्पादकीय में सवाल उठाते हुए पूछा गया कि ‘केंद्र ने कहा कि थिएटरों में राष्ट्रगान बजाना महत्वपूर्ण नहीं है जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही फैसले पर यू-टर्न ले लिया. आरएसएस और अन्य राष्ट्रवादी संगठनों का इस पर क्या रूख है.’