उत्तर प्रदेश शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड का कार्यकाल खत्म हो गया है। अब यह दोनों बोर्ड फिलहाल सरकार के अधीन ही रहेंगे।  शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी (Syed Waseem Rizvi) का 18 मई को कार्यकाल समाप्त हुआ जबकि यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ज़ुफर फारूकी (Zufar Farooqui) का कार्यकाल 31 मार्च को ही समाप्त हो चुका है। दोनों वक्फ बोर्ड में लॉकडाउन के चलते नए बोर्ड का गठन संभव नहीं है. लिहाजा सरकार ने दोनों ही वक्फ बोर्ड में सीईओ नियुक्त कर दिए हैं।

सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे जुफर फारुकी तो पिछले लगातार 10 वर्षों तक बोर्ड का संचालन करते रहे। वह वर्ष 2010 में पहली बार बसपा के कार्यकाल में बोर्ड के चेयरमैन बने थे। उसके बाद सपा सरकार 2012 में बनी तो भी वह अपने पद पर बने रहे। फिर 2015 में वह दोबारा चेयरमैन बने और 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बावजूद वह बोर्ड का संचालन करते रहे।

दूसरी ओर शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने  2015 में अपना पद सम्भाला था और उसके बाद वह लगातार कार्य करते रहे। भाजपा की सरकार आने के बाद उन्होंने भी अपना पद नहीं छोड़ा था। सरकार की तरफ से बात करते हुए अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि लॉकडाउन की वजह से कोई भी चुनाव की प्रक्रिया अभी नहीं की जा सकती है। लिहाजा जब तक चुनाव हो नहीं जाते तब तक सरकारी सीईओ पूरा कामकाज देखेंगे।

मोहसिन रजा ने कहा कि शिया और सुन्नी दोनों वक्फ बोर्ड समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान गठित हुए थे और दोनों ही वक्फ बोर्डों में वक्फ़ की जमीनों को खुर्द-बुर्द करने और उनको बेचे जाने समेत तमाम तरह की अनियमितताएं पाई गई थीं। मोहसिन रजा ने कहा कई जगह पर तो कानून को दरकिनार करते हुए मनमाने ढंग से वक़्फ़ की संपत्तियों पर मुतवल्ली नियुक्त किए गए।

उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच राज्य सरकार ने सीबीआई को भी सौंपी है। मोहसिन रजा ने कहा कि अभी चुनावी प्रक्रिया संभव नहीं लिहाजा वक्फ बोर्ड सरकार के अधीन काम करेंगे। उन्होंने कहा कि हम प्रदेश वासियों को इस बात के लिए आश्वस्त कराते हैं योगी सरकार में बेहद ईमानदार पारदर्शी और अच्छे चेयरमैन चुनकर वक्फ़ बोर्ड में आएंगे जो अल्पसंख्यक के हितों में काम करेंगे।

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