लखनऊ: उप्र की आधी आबादी को सुरक्षित वातावरण देने के नाम पर सत्ता में आयी भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्तासीन होने के साथ ही ‘एक्शन’ में आ गयी थी। हालात ऐसे हुए कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश देने से पहले ही सूबे की पुलिस ने स्वमेव ‘एण्टी रोमियो स्क्वायड’ बनाकर कार्रवाई शुरू कर दी। लेकिन सरकार के मंसूबों पर सवालिया निशान उस समय लगने लगा जब मंत्रिमण्डल में शामिल एक राज्यमंत्री खुद ही एक अबला के शारीरिक उत्पीड़न का आरोपी रहा हो। इतना ही नहीं अभी इस मंत्री को न्यायालय ने निर्दोष भी करार नहीं दिया है।

संभव है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सच से दो-चार न हों और मंत्री पद पाने के लिए तथ्यों को छिपाया गया हो। दरअसल सूबे में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 19 मार्च को सरकार बनी थी। मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के शपथ लेने के अलावा उनके सहित मंत्रिमण्डल में 25 ने काबीना मंत्री, 9 ने राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार तथा 13 ने राज्य मंत्री की शपथ ली थी। शपथ लेने वाले 6 नेता ऐसे थे जो कि उप्र में किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। यह ऐसे नेता थे जिन्होंने विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़ा था और न ही ये उच्च सदन यानि विधान परिषद के ही सदस्य थे।

वहीं दूसरी ओर भाजपा ने विधानसभा चुनाव के समय किसी भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था लेकिन पार्टी को ‘सबका साथ सबका विकास’ के फार्मूले पर चलना था। ऐसे में पार्टी के कई पुराने मुस्लिम नेताओं को दरकिनार कर पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी रहे मोहसिन रजा को मंत्री बनने का मौका मिल गया। मोहसिन भी उप्र विधानमण्डल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे और आज की तारीख में भी नहीं हैं। योगी मंत्रिमण्डल में उन्हें अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री बनाया गया।

इन्हीं मोहसिन रजा के खिलाफ साल 1989 में झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली एक महिला ने धारा 354 के तहत राजधानी के तालकटोरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। महिला ने आरोप लगाया था कि मोहसिन रजा ने उनके साथ न सिर्फ छेड़खानी की बल्कि जबरिया संबंध बनाने का भी प्रयास किया।

तालकटोरा थाने के रजिस्टर संख्या चार पर मुकदमा अपराध संख्या 236/89 दिनांक 10 सितम्बर 1989 को दर्ज हुआ था। जिसमें पीड़िता ने मोहसिन रजा निवासी राजाजीपुरम थाना तालकटोरा पर धारा 354 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में नाले के किनारे झोपड़ पट्टी में रहने वाली एक अल्पसंख्यक महिला का शीलभंग करने का प्रयास का आरोप था। इस मामले में विवेचक ने आरोपी की पहचान सिद्ध करने और जांच के बाद न्यायालय में आरोप पत्र (संख्या-145) दाखिल किया। सूत्र बताते हैं कि यह प्रकरण न्यायालय में अब भी विचाराधीन है और आरोपी मोहसिन रजा को अब तक ‘क्लीन चिट’ नहीं मिली है।

फर्जीवाड़ा करके वक्फ संपत्ति बेचने का भी लगा है आरोप

उल्लेखनीय है कि सूबे में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने और मोहसिन रजा के मंत्री बनने के ठीक पहले भी उन पर एक मुकदमा दर्ज हुआ था। 22 नवम्बर 2016 को राजधानी की हजरतगंज कोतवाली में दर्ज मुकदमें में उन पर वक्फ संपत्तियों को फर्जीवाड़ा करके बेचने का आरोप लगा था। यह मुकदमा राजधानी निवासी एवं वक्फ मीर रजा अली सफीपुर उन्नाव के मुतवल्ली मेंहदी मियां ने दर्ज करायी थी।

वहीं तालकटोरा थाने में दर्ज मामले के बारे में जब ‘माननीय’ मंत्री मोहसिन रजा से उनके मोबाइल नम्बर (98………786) पर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो वो इस मुकदमें के बावत तो कुछ नहीं बोले, उल्टे पत्रकारिता क्या होती है और उसके सिद्धान्त क्या होते हैं, इस पर उन्होंने लम्बा भाषण दे डाला। उनके ‘ज्ञान’ देने की प्रक्रिया के बीच ही जब उनसे इससे इतर मुद्दे की बात करने का प्रयास किया गया तो वह पूर्ववत अपनी रौ में ही बहते रहे और कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया।

जानिए क्या होती है धारा – 354

भारतीय दण्ड विधान (भा.द.वि.) की धारा 354 उन पर तामील की जाती है जिन पर किसी महिला ने अपनी मर्यादा व मान सम्मान को क्षति पहुंचाने का आरोप लगाया हो, या फिर भुग्तभोगी के साथ गलत मंशा के साथ जोर जबरदस्ती की गई हो।

आरोप तय होने पर मिलती है यह सजा

यदि माननीय न्यायालय में आरोप सिद्ध हो जाता है तो आरोपी को दो साल तक की कैद या फिर जुर्माना, या फिर दोनों की सजा हो सकती है। मोहसिन रजा के द्वारा अपने इलेक्सन एफीडेविट मे इस FIR की जानकारी छुपाने पर लखनऊ हाईकोर्ट के वकील सत्येन्द्र नाथ श्रीवास्तव सोमवार को रिट ला रहे है. चुनाव के समय सत्येन्द्र जी ने चुनाव अधिकारी से आपत्ति दर्ज कराई थी पर सेटिग के जमाने मे यह दरकिनार कर दी गई..

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