Friday, July 30, 2021

 

 

 

कांग्रेस साम्प्रदायिकता की जननी हैं तो सपा माफिया और गुंडों की संरक्षक: शीया-सुन्नी ओलमा फ़्रंट

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शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने सपा और कांग्रेस के गठबंधन का बहिष्कार किया है. शिया-सुन्नी एकता मंच के बैनर तले सोमवार को सिब्तैनाबाद इमामबाड़े में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मुसलमानों से दोनों पार्टियों को वोट न देने की अपील की हैं.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा से मुसलमानों की जड़ें काटने का काम किया है जबकि राज्य में सपा की मौजूदा सरकार ने मुस्लिम कौम को धोखे के सिवा कुछ नहीं दिया है. मौलाना जवाद ने कहा कि सपा ने अपने पूरे कार्यकाल में दंगे के अलावा मुस्लिमों के लिए कुछ भी नहीं किया है. उन्होंने कहा, सपा के शासन में पूरे उत्तर प्रदेश में लगभग 400  सांप्रदायिक दंगे हुए जिसमें बड़े दंगे भी शामिल हैं. इन दंगों में मुसलमानों का भारी जानी व आर्थिक नुकसान भी हुआ. मुजफ्फरनगर दंगों में मुसलमानों के नुकसान का अनुमान 2002 में गुजरात में हुए दंगों से भी कहीं अधिक हे.

उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव सरकार ने मुसलमानों को सिर्फ फसाद और कब्रिस्तान दिये हैं. मुख्यमंत्री ने आतंकवाद के आरोप में अदालतों से बरी हुए मुस्लिम नौजवानों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर अपने पिता मुलायम सिंह यादव के इस आरोप को साबित किया है कि वह मुस्लिम विरोधी हैं. उन्होंने आगे कहा, उत्तर प्रदेश में जितने भी दंगे हुए है जैसे मथुरा के कोसी कलां, प्रताप गढ़ के अस्थाना गांव, गोंडा , सीतापुर, बरेली, बहराइच, इटावा, कन्नौज आदि इन सभी में समाजवादी सरकार के करीबी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नजदीकी लोग ही शामिल पाए गए है.

इसी के साथ कांग्रेस पर भी अपना कड़ा रुख अपनाते हुए कहा गया कि सांप्रदायिकता को जन्म देने वाली ही कांग्रेस हैं. जो सपा के पदचिन्हों पर चल रही हैं. कांग्रेस और सपा ने जितने घाव मुसलमानों को दिए हैं उन पर एक मोटी किताब तैयार हो सकती है. बाबरी मस्जिद में मूर्तियां रखवाने से लेकर मस्जिद विध्वंस तक की सभी जिम्मेदारी कांग्रेस पर ही लागू होती है, कांग्रेस द्वारा कराए गए सांप्रदायिक दंगों की एक लंबी सूची है.  दंगों के बाद कांग्रेस ने जांच के लिए आयोग तो बहुत बनाए मगर आज तक किसी आयोग की रिपोर्ट पर अमल नहीं हो सका और न मुसलमानों को मुआवजा दिया गया.

उलेमा ने कहा कि इस गठबंधन का विरोध करना चाहिए ताकि दोनों पार्टियों के चेहरों से दोहरी नकाब उतर सके, इस चुनाव में मुसलमान एकजुट होकर इस गठबंधन को विफल बनाएँ और ऐसी पार्टी को सत्ता की बागडोर सौंपें जो उनके विकास और कल्याण के लिए काम करने का वादा करे.

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