राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अब अपने इतिहासकारों से नई रामायण लिखवाएगा. दरअसल संघ का मानना है कि पुरानी रामायण भ्रामक है और इनमे हिंदू विरोधियों ने छेड़छाड़ की है.

ऐसे में अब आरएसएस राष्ट्रीय सम्मेलन करेगा. जिसमे देश भर के नामी विद्धान अपने विचारों को इसमें तथ्यों के साथ रखेंगे.  संकलन योजना के संगठन सचिव बालमुकुंद पांडेय कहते हैं कि दुनिया भर में करीब तीन हजार तरह की रामायण हैं. लोग अपने मन से रामायण लिख रहे हैं. कई लोग राम के इतिहास को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि भारत के लिए राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और विश्व के लिए एक आदर्श. इन्हीं सब भ्रांतियों को दूर कर सही रामायण को प्रकाशित किया जाएगा.

इसके लिए 12-13 अगस्त को गोरखपुर में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है. यह सम्मेलन संघ के अनुषांगिक संगठन अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना आयोजित कर रहा है. संकलन योजना के संगठन सचिव बालमुकुंद पांडेय कहते हैं कि राम ने कभी सीता को वन में नहीं भेजा. राम एक अच्छे पुत्र, राजकुमार, के साथ अच्छे शिष्य और अच्छे पति भी थे.

पांडेय कहते हैं कि हिन्दू परम्परा से द्वेष रखने वालों ने बाद में ऐसे तथ्यों को राम कथा में जोड़ दिया, जिससे राम के प्रति लोगों में भ्रांतियां पैदा हुई. बता दें कि देश भर में 3000 से ज्यादा रामायण लिखीं गईं हैं परंतु श्रीतुलसीदास कृत श्री रामचरितमानस रामायण को सबसे प्रामाणिक माना जाता है.

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