मंगलवार को गुजरात में तीन राज्यसभा सीटों के लिए हुई वोटिंग के बाद से ही दो सीटों पर बीजेपी नेता अमित शाह और स्मृति ईरानी की जीत लगभग तय मानी जा रही थी. मगर तीसरी सीट कांग्रेस और बीजेपी की नाक का सवाल बनी हुई थी. इस सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल और बीजेपी नेता बलवंत राजपूत के बीच मुकाबला था.

अहमद पटेल को जीतने के लिए 45 वोट की जरूरत थी. उन्हें अपनी पार्टी के 44 विधायकों का ही समर्थन प्राप्त था. हालांकि कांग्रेस के जिन दो विधायकों ने बगावत की थी, उनका वोट मिलना कांग्रेस के लिए संभव नहीं था और सौभाग्य से इन दोनों विधायकों ने अपना मत पत्र पोलिंग एजेंट को दिखाया.

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कांग्रेस ने इसी को जरिया बनाते हुए  चुनाव आयोग का दरवाज़ा खटखटाया और दोनों विधायकों का वोट रद्द करने की मांग की. आखिरकार चुनाव आयोग ने कांग्रेस की मांग मानते हुए दोनों विधायकों के वोट रद्द कर दिए, जिसके बाद अहमद पटेल की जीत का रास्ता साफ़ हो गया. अहमद पटेल को 44 वोट मिले. हालांकि अगर चुनाव आयोग पार्टी को मिले को दो वोटों को रद्द नहीं करता तो पार्टी की जीत पक्की थी.

ऐसे में अब बीजेपी पटेल की जीत को नहीं पचा पा रही है. गुजरात के सीएम विजय रुपानी ने कहा, वे चुनाव आयोग के इस फैसले से सहमत नहीं है और रद्द हुए वोटों के लिए आने वाले दिनों में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. उन्होंने आगे कहा कि अगर अहमद पटेल को दो वोट नहीं मिलते तो वो हार जाते.

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