Tuesday, October 26, 2021

 

 

 

RSS की प्रयोगशाला है भोपाल जेल, ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने पर ही मिलता है एक बोतल पानी

- Advertisement -
- Advertisement -

bhopal jail 1478098922 660x330

भोपाल फर्जीं मुठभेड़ को एक साल हो गया है पर आज भी सुरक्षा के नाम पर रात के पहर में आतंकवाद के आरोप में बंद हर कैदी को ‘मैं हाजिर हूं’ बोलना पड़ता है। ऐसा न करने पर पिटाई शुरु हो जाती है। यह टार्चर की वो प्रक्रिया है जिसके तहत व्यक्ति को सोने नहीं दिया जाता, मानसिक-शारीरिक रूप से कमजोर कर मौत के मुहाने ढकेल दिया जाता है। यह रणनीति भोपाल जेल में बदस्तूर जारी है।

अबकी बार भइया दूज की मुलाकात को कैंसिल कर दिया गया और कहा गया कि ऐसा आईबी एलर्ट के चलते किया गया। जेल प्रशासन महिला परिजनों पर बुरके को हटाने का लगातार दबाव बनाता है। कभी-कभी तो जबरन भी हटा देते हैं।

रिहाई मंच ने भोपाल जेल में सिमी के सदस्य होने के आरोप में कैद आरोपियों पर जेल प्रशासन द्वारा बर्बर पिटाई और हत्या करने की साजिश का आरोप लगाया है। भोपाल जेल में बंद आरोपियों के परिजनों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर कहा है कि पिछले साल 31 अक्टूबर 2016 को भोपाल में हुए फर्जी मुठभेड़ जिसमें 8 आरोपियों की पुलिस ने हत्या कर दी थी, के बाद से ही बाकी बचे आरोपियों को मारा-पीटा जा रहा है। पिटाई का यह क्रम हर दूसरे-तीसरे दिन होता है जिसमें जेल अधिकारी हत्या, बलात्कार और डकैती जैसे मामलों में बंद कैदियों से एक-एक आरोपी को लाठी और डंडों से पिटवाता है और उनसे ‘जय श्री राम’ का नारा लगवाता है। पिटाई के दौरान उनसे अल्लाह और मुसलमानों को अपशब्द कहने के लिए कहा जाता है जिससे इनकार पर उन्हें और बुरी तरह मारा-पीटा जाता है।

परिजनों से आरोपी बताते हैं कि उन्हें पिछले साल की फर्जी मुठभेड़ के बाद से ही पुलिस द्वारा किसी भी दिन फर्जी मुठभेड़ में मार देने की धमकी दी जाती रहती है। कहा जाता है कि सरकार उन्हीं की है- वो जो चाहे, कर सकते हैं। फर्जी एनकांउटर के बाद से ही उनके खाने में कटौती कर दी गई और पानी भी दिन भर में सिर्फ एक बोतल दिया जा रहा है जिससे कैदी पीने और शौच करने से लेकर वजू करने तक का काम करने को मजबूर हैं। यह पानी भी उन्हें तब नसीब होता है जब वे जय श्री राम का नारा लगाते हैं। ऐसा न करने पर उनकी फिर पिटाई की जाती है। अब्दुल्ला ने जब जय श्री राम का नारा नहीं लगाया तो उसके नाखून निकाल लिए गए और साजिद के सिर को दीवाल से दे मारा गया।

परिजनों से सलाम करने की भी मनाही से जेल प्रशासन की मुस्लिम विरोधी मानसिकता को समझा जा सकता है। हमारे देश में अभिवादन के बहुतेरे क्षेत्रीय और सामुदायिक तरीकें हैं। लेकिन जिस तरीके से भोपाल जेल में सलाम करने तक पर मनाही है। यहां आरएसएस का जेल मैन्युवल चलता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से शिकायत करने के बाद भी उनकी पिटाई नहीं रूकी। यातना का यह सिलसिला खुद जेलर की देखरेख में होता है। जेलर फिल्मी अंदाज में डायलाग बोलता है जब तक मेरे हाथ में डंडा घूमता है तब तक पीटते रहो। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि उन्हें नहीं लगता की यहां से जिन्दा निकल पाएंगे। न जुल्म बंद होगा और न रिहाई मिलेगी।

भोपाल जेल में बंद अबू फैसल को इतना पीटा गया कि उसके पैर में फ्रैक्चर हो गया। इकरार शेख ने भोपाल हाईकोर्ट में हलफनामा दिया है कि उनके दाढ़ी के बाल नोचे जा रहे हैं तथा सर के बाल आधे काट दिए गए हैं, उनके पैरों के तलवों पर बुरी तरह मारा जाता है। उनकी आखिरी आस अदालत से है और वह भी उनकी बात सुनने से इनकार कर देती है और उन्हीं पर दोष मढ़ देती है। नागरिक संगठनों ने जब इस पर सवाल उठाया तो भोपाल जेल प्रशासन ने मीडिया के माध्यम से उसके पैर फ्रैक्चर होने की कहानी को जेल से भागने की कहानी बताकर मामले को संवेदनशील बनाने की कोशिश की। अपनी ही कहानी में उलझते अधिकारियों ने कहा कि उसने खाने-पीने व अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए सीखचों में अपना पैर फंसाकर तोड़ लिया।

इकरार शेख ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए बताया था कि जेल अधिकारी उसे रोजना मारते हैं। उसे अपने धर्म के खिलाफ नारे लगाने को मजबूर किया जाता है। इकरार शेख को यह बयान देने के बाद जेल में दुबारा पीटा गया जिसकी सूचना उसने मुलाकात के दौरान अपने परिजनों को दी है। मुलाकात के दौरान कैदियों पर यह दबाव भी डाला जा रहा है कि वे परिजनों से अपने टार्चर की बात नहीं बताएं नहीं तो उन्हें मार दिया जाएगा। इनामुर्र रहमान ने 6 मई 2017 को जेल में दी जा रही यातना पर सेशन कोर्ट को हलफनामा द्वारा अवगत भी कराया है। शराफत के मुंह पर चोट के जख्म थे जब उसके परिजनों ने पूछा तो वह उसे टाल गया। इस टालने को हम कुछ नहीं हुआ कह देंगे तो शायद हम भोले हैं और पुलिस के चरित्र से परिचित नहीं हैं।

कैदियों के परिजनों ने गर्म कपड़े देना चाहा। इसकी भी मनाही हो गयी। पिछले साल की घटना के बाद उनसे उनके कपड़े समेत बाकी रोजमर्रा के सामान तक छीन लिए गए थे। ठंड के बावजूद उन्हें सिर्फ एक कम्बल दिया जा रहा था। जबकि उससे पहले ठंड के मौसम में उन्हें 3 से 4 कम्बल दिए जाते थे।

परिजनों को पहले 8 दिनों में दो बार 20-20 मिनट के लिए मुलाकात कराई जाती थी। लेकिन अब जेल मैन्यूअल के खिलाफ जाते हुए उन्हें 15 दिनों में सिर्फ 5 मिनट की मुलाकात कराई जा रही है। यह मुलाकात भी फोन के जरिए होती है। जिसमें कैदी और परिजन के बीच में जाली और शीशा होता है जिन्हें फोन लाइन से कनेक्ट कर बात कराई जाती है और बात की रिकार्डिंग का आरोप भी कैदी और परिजन बराबर लगाते रहते हैं। यह आरोप इसलिए सही भी है कि जब भी कैदी जेल में हो रही यातना के बारे में बताते हैं तो उसके बाद उस बात को लेकर उनकी पिटाई की जाती है और आइंदा से ऐसी हरकत न करने की धमकी दी जाती है। जैसे ही पांच मिनट होता है कैदी को परिजनों के सामने घसीटते हुए अंदर ले जाया जाता है जिससे उसके परिजनों को जाते-जाते भी उनके हालात और उनकी कुछ मदद न कर पाने की लाचारी अन्दर ही अन्दर उनको खाती जा रही है। परिजनों की शिकायत है की उन्हें जेलर से मिलने नहीं दिया जाता।

उन्हें जेल मैन्यूअल के खिलाफ जाते हुए 24-24 घंटे तक बंद रखा जा रहा है। परिणाम यह कि कैदी दिमागी संतुलन खोते जा रहे है। उज्जैन के आदिल मानसिक रुप से काफी बीमार हैं पर उनका इलाज नहीं कराया जा रहा है। मुकदमे को टालने से लेकर, मुलाकात की समय सीमा घटाने और ठंड में सिर्फ एक कम्बल देना, इन विचाराधीन कैदियों को मानसिक और शारिरिक तौर पर कमजोर करके धीरे-धीरे मारने की साजिश है।

मोहम्मद इरफान को अपनी आख का इलाज करवाना है पर जेल प्रशासन उसका कोई सहयोग नहीं कर रहा। इसे लेकर उन्होंने 16 जनवरी 2016 को चीफ जस्टिस आफ इंडिया के नाम पत्र भी भेजा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles