उत्तर प्रदेश पुलिस की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने दो मथुरा मंदिरों के दान कोष से 11 करोड़ रुपये के गबन का पता लगाया है और शुक्रवार को लखनऊ के पुलिस स्टेशन में 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

जांच से जुड़े वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मथुरा के गोवर्धन स्थित मुकुट मुखार बिंद मंदिर व हरगोकुल दसवलिया ब्राह्मणान मंदिर की गबन राशि अधिक हो सकती है। एसआईटी ने मंदिर के रिसीवर रमाकांत गोस्वामी, मनु ऋषि, भंडारी संतोष कुमार, रामकष्ण शर्मा, राधा किशन, विवेक शर्मा, पिंटू सैनी, उसकी पत्नी कमलेश, लटटू सैनी, बिहारी लाल सैनी और कोकन बाबू मिश्र को नामजद किया गया है।

अधिकारी ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (सरकारी कर्मचारी द्वारा आपराधिक उल्लंघन), 408 (क्लर्क या नौकर द्वारा विश्वास का आपराधिक उल्लंघन), 423 (बेईमान या धोखाधड़ी का निष्पादन) और 120-बी (धोखाधड़ी करने के लिए सामान्य इरादे के साथ आपराधिक साजिश में प्रवेश) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एफआईआर के अनुसार, गबन 2014 और 2018 के बीच रिसीवर और अन्य आरोपियों द्वारा किया गया था। अधिकारी ने कहा कि जुलाई 2019 में राज्य सरकार द्वारा एसआईटी को एक प्रारंभिक जांच सौंपी गई थी और इसे फरवरी 2020 में पूरा किया गया था। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज करने और आगे की जांच करने की अनुमति कोविड-19 के कारण राज्य सरकार के पास लंबित थी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कुछ दिन पहले इस मामले में प्राथमिकी दर्ज किए जाने के आदेश देने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच में सामने आया है कि रिसीवर रमाकांत गोस्वामी के साथ साठगांठ करके अन्य आरोपितों ने मंदिर की सजावट के लिए फूल, संपत्तियों की खरीद का भुगतान तिगुनी कीमत से किया। इससे हासिल हुई रकम को आपस में बांट लिया। इसके अलावा वृद्धा पेंशन, कन्या विवाह व छात्रवृत्ति के नाम पर मिले दान के पैसे का भी गबन किया।

एफआईआर के मुताबिक, वर्ष 2010 में इस संपत्ति की बाजार में कीमत 90 लाख रुपये थी। रमाकांत ने इसे साल भर बाद दो करोड़ 70 लाख में खरीदा। उसने वैल्युर राजेश द्विवेदी की मदद से संपत्ति की मार्केट वैल्यू 3 करोड़ 16 लाख रुपये दिखाई। इस फर्जीवाडे में सहायक प्रबंधक मनु और भंडारी संतोष कुमार की भी भूमिका थी।

इसके अलावा करोड़ों का यह गबन मंदिर में बनने वाले फूल बंगले के नाम पर किया गया। वर्ष 2014-15 में मंदिर को दान में 48 लाख 35 हजार रुपये, 2015-16 में एक करोड़ 40 लाख 66 हजार 616 रुपये, 2016-17 में 3 करोड़ 2 लाख 40 हजार 142 रुपये और 2017-18 में 2 करोड़ 24 लाख 38 हजार 172 रुपये का भुगतान किया गया। यह रकम सजावट के नाम पर खर्च की गई जबकि एक फूल बंगले की अधिकतम कीमत 3500 रुपये थी।

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