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लखनऊ। हेट स्पीच को लेकर सूबे के मुखिया को कटघरे में खड़ा करने वाले गोरखपुर के परवेज परवाज की गिरफ्तारी को रिहाई मंच ने राजनीतिक करार दिया। मंच ने कहा कि इस मामले में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी और आज हाईकोर्ट में अरेस्ट स्टे मामले पर बहस थी लेकिन रात को ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। वहीं इस मामले में हाईकोर्ट में बहस कर रहे अधिवक्ता फरमान अहमद नकवी ने बताया कि उनके साथ के दूसरे अभियुक्त की गिरफ्तारी पर रोक लग गई है।
रिहाई मंच नेता राजीव यादव ने कहा कि 2007 गोरखपुर सांप्रदायिक हिंसा में योगी आदित्यनाथ के हेट स्पीच मामले का मुकदमा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ज्ञातव्य हो कि याचिकाकर्ता परवेज परवाज पर इस मामले में पीछे हटने के लिए काफी दबाव रहा पर वे मजबूती से खड़े रहे। पैसठ वर्षीय परवेज परवाज और दूसरे सह अभियुक्त पर जून 2018 में सामूहिक बलात्कार का मुकदमा भी दर्ज हुआ था। पुलिस ने मामले की तफ्तीष की और मामले को फर्जी पाया, आखिरकार मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। जहां एक तरफ योगी आदित्यनाथ को लेकर चल रहे मामले में 30 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट और 13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई थी, वहीं दूसरी तरफ 18 अगस्त 2018 को एसएसपी गोरखपुर ने जून 2018 के सामूहिक बलात्कार मामले की अग्रिम विवेचना का 12 अगस्त 2018 की आख्या पर आदेष कर दिया। सवाल यह है कि मामले में फाइनल रिर्पोट लगने के बाद 12 अगस्त 2018 की आख्या क्या है जिसके आधार पर एसएसपी ने 18 सितंबर को पुनः अग्रिम विवेचना महिला थाने की आईओ इस्पेक्टर को दे दिया। बिना विवेचक बनाए गए आखिर कैसे 12 अगस्त को इनवेस्टिगेषन टेक ओवर करके रिपोर्ट समिट कर दी गई। 16 सितंबर को गवाहों को भी नोटिस जारी कर दिया गया कि वह आ कर अपना बयान दर्ज कराएं। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में पैरवी कर रहे एडवोकेट फरमान अहमद नकवी ने सवाल उठाया है कि जब तक फाइनल रिपोर्ट रिजेक्ट करके दूसरे आईओ को नहीं दी जाती, तब तक कैसे कोई अन्य विवेचना की जा सकती है।
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रिहाई मंच नेता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद अपने खिलाफ दर्ज मामले में जज बनकर खुद पर मुकदमा न चलाने का फरमान देते हैं और अब उनके खिलाफ अदालत में खडे़ परवेज परवाज के खिलाफ राजनीतिक द्वेष के तहत कार्रवाई की जा रही है। यह सब कानून के परे जाकर योगी आदित्यनाथ के आदेष पर खुल्लमखुल्ला हो रहा है। वरना एसएसपी बताएं कि कैसे उनके आदेष से पहले नया विवेचक आ जाता है और रिपोर्ट भी दे देता है। इसके पहले भी 2007 के गोरखपुर सांप्रदायिक हिंसा में दर्ज हुए मुकदमें में योगी के साथ सहअभियुक्त और पूर्व विधान परिषद सदस्य वाईडी सिंह ने मुकदमें के वादी परवेज परवाज पर दबाव बनाने के लिए गोरखुपर सीजेएम के सामने याचिका दायर कर परवेज परवाज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की कोषिष की थी। योगी आदित्यनाथ के साथ सांप्रदायिक हिंसा के सहआरोपी वाईडी सिंह ने याचिका में आरोप लगाया था कि परवेज परवाज ने 2007 दंगे की योगी के भाषण की जो सीडी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है वह फर्जी है। अपनी इस याचिका में उन्होंने परवेज परवाज पर यह भी आरोप लगाया था कि वे एक साम्प्रदायिक व्यक्ति हैं जिन्होंने सद्दाम हुसैन की फंासी का विरोध किया था। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि परवेज परवाज ने दंगा किया है और कई दुकानों में लूट-पाट की है, लेकिन उन्होंने अपनी याचिका में एक भी ऐसी दुकान या दुकान मालिक का नाम नहीं बताया था जिसमें उनके मुताबिक परवेज परवाज ने लूटपाट की हो। यहां गौरतलब है कि 2015 में वाईडी सिंह की तरफ से परवेज परवाज के खिलाफ ऐसी ही एक याचिका गोरखपुर सीजेएम के सामने लगाई गई थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।
यह सब योगी आदित्यनाथ के ऊपर दर्ज मुकदमों को कमजोर करने की कोशिश है। गौरतलब है कि 2007 गोरखपुर सांप्रदायिक हिंसा और उसमें योगी आदित्यनाथ की भूमिका को लेकर परवेज परवाज और सामाजिक कार्यकर्ता असद हयात एडवोकेट के द्वारा उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष एक रिट याचिका दायर की गई थी।
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