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अहमदाबाद: गुजरात में 7 अल्पसंख्यक समुदाय होने के बावजूद बोर्ड एग्जाम फॉर्म में धर्म वाले कॉलम को सिर्फ दो हिस्सों में बांटा गया है। जो इस प्रकार है – मुस्लिम या अन्य। इस खुलासे के बाद मुस्लिम समुदाय मे डर फ़ेल रहा है।

जानकारी के अनुसार, गुजरात सरकार बोर्ड एग्जाम में बैठने जा रहे मुस्लिम स्टूडेंट्स से उनके धर्म की पहचान मांग रही है। 10वीं और 12वीं में बोर्ड एग्जाम देने को तैयार स्टूडेंट्स को फॉर्म में अल्पसंख्यक समुदाय का चुनाव करने पर दो विकल्प मिलते हैं। अल्पसंख्यक पर ‘हां’ करने के साथ ही ऑनलाइन फॉर्म पूछता है, ‘प्लीज सेलेक्ट’ यहां केवल दो विकल्प मिलते हैं, मुस्लिम और अन्य।

गुजरात में कम से कम चार अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के लोग रहते हैं। इनमें ईसाई, सिख, बौद्ध और राज्य में सबसे ज्यादा प्रभावी और अमीर जैन समुदाय के लोग शामिल हैं। बावजूद ये सवाल सिर्फ मुस्लिम समुदाय के छात्रों से ही किया जा रहा है।

Courtesy: Lokbharat

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इस मामले में एक छात्र के पिता ने अपना डर जाहीर करते हुए बताया कि मैं डरा हुआ हूं. 2002 से पहले ऐसे ही गुजरात सरकार ने पुलिस से इलाके के मुस्लिम कारोबारियों और उनकी दुकानों की पहचान करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि मेरे रेस्टुरेंट की पहचान की गयी और उसे जला दिया गया था। बाद में पता चला था कि दंगाइयों ने उसी आंकड़े का इस्तेमाल किया था, जिसे पुलिस और जनगणना करने वालों ने जुटाया था। उन्होंने कहा कि मैं अपने बेटे को लेकर डरा हुआ हूं. सरकार क्यों जानना चाहती है कि छात्र मुस्लिम है या नहीं?

इस मामले में विपक्ष के नेता और वडगाम विधानसभा क्षेत्र के विधायक जिग्नेश मेवाणी ने इसे असंवैधानिक करार दिया है।पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने भी इसे लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर भाजपा एकता और राष्ट्रवाद का जिक्र करती है और दूसरी ओर अपनी विभाजन आधारित नीति अख्तियार कर रही है।

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