Sunday, August 1, 2021

 

 

 

रिहाई मंच ने सैफुल्ला एनकाउंटर की न्यायिक जांच और आईजी एटीएस पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की उठाई मांग

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लखनऊ: रिहाई मंच ने लखनऊ के ठाकुरगंज में हुए कथित मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए इसे अंजाम देने वाले आईजी एटीएस असीम अरूण और उनके पूरे टीम पर सैफुल्ला की हत्या का मुकदमा दर्ज कर तत्काल निलंम्बित करने की मांग की है।

मंच ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायधीश से न्यायिक जांच कराने की मांग की है। मंच ने कानपुर से आईएस के नाम पर पकड़े गए इमरान और फैसल के परिजनों को एटीएस द्वारा जबरन उनके घर मेंबंधक बनाने का आरोप लगाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका प्रेषित की है। मंच ने उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी पर मुकदमा दर्ज करने की निंदा की है।

रिहाई मंच द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने बताया कि मंच के नेता राजीव यादव और अनिल यादव ने मौलाना आमिर रशादी के लखनऊ स्थित कार्यालय पर उलेमा काउंसिल के नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने आरोप लगाया है कि सैफुल्ला की हत्या के तीन दिन बाद भी एटीएस उसके आईएस से जुड़े होने का एक भी सुबूत नहीं दे पाई है और अब अपनी इज्जत बचाने के लिए उसके आईएस से स्वतः प्रेरित होने की अफवाह फैलाकर हत्या को जायज ठहराने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस कथित मुठभेड़ के नायक के बतौर अखबारों में अपनी प्रोफाइलिंग कराने वाले आईजी एटीएस असीम अरूण का अब तक सैफुल्ला के किसी टेरर माड्यूल से जुड़े होने का कोई ठोस सुबूत न दे पाना और मीडिया के एक हिस्से का सैफुल्ला के पिता की जांच की मांग को न दिखाना साबित करता है कि एटीएस और मीडिया का मुस्लिम विरोधी नापाक गठजोड़ पूरे मामले में असीम अरूण को बचाने में लग गया है

शाहनवाज आलम ने कहा कि असीम अरूण का पत्रकारों के इस सवाल पर कि सैफुल्ला के पास खतरनाक हथियार नहीं होने के बावजूद उसे मारा क्यों गया, यह कहना कि पुलिस से चूक हो गई, या इस सवाल पर कि मिर्ची बम के इस्तेमाल के बावजूद गोली क्यों मारी गई जबकि घटना स्थल से एक किलोमीटर दूर के लोगों को भी सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और वह मिर्ची बम से ही मर गया होता, उनका यह कहना कि हो सकता था कि आतंकी के पास ऐसा कोई केमिकल हो जिससे मिर्ची बम का असर न होता हो इसलिए उसे गोली से मार गया जबकि बाद में ऐसे किसी भी केमिकल का बरामद न होना असीम अरूण के आपराधिक प्रवित्ति को दर्शाता है। जो एक मुस्लिम युवक की ठंडे दिमाग से की गई निर्मम हत्या को चूक कह कर अपनी साम्प्रदायिक कार्रवाई को जायज ठहराना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि स्वतःप्रेरित होने के आरोप में फर्जी मुठभेड़ दिखाकर सैफुल्ला को मारने वाले असीम अरूण को यह भी बताना चाहिए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर भारत को हिंदू राष्ट्र बना देने की खुलेआम संविधान विरोधी बातें प्रसारित करने वाले रेडिकलाइज्ड हिंदू युवकों को इसकी सजा देना तो दूर कभी थाने बुलाकर डांटा भी है कि नहीं।

रिहाई मंच नेता ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा में रह चुके असीम अरूण ने बदले राजनीतिक हालात में अपने को आने वाली सरकार के गुडबुक में दर्ज कराने के लिए इस फर्जी मुठभेड़ को अंजाम दिया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना के बाद मुसलमानों में आतंक का माहौल बनाने के लिए लखनऊ के आस पास के इलाकों में पुलिस ने मुसलमानों को आतंकवाद के नाम पर डराने-धमकाने का काम शुरू कर दिया है। जिसके तहत कल बाराबंकी में फैज नाम के मुस्लिम युवक को पुलिस ने उठाकर उससे हिंदू धर्म के बारे में उसकी राय पूछी। जब फैज ने कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करता है तब उससे पुलिस ने संस्कृत में कुछ कहने को कहा। जिस पर उसने गायत्री मंत्र सुना दिया जिसके बाद पुलिस ने उसे आईएसआईएस से नहीं जुड़ा होना माना और छोड़ दिया।

इसी तरह फैजाबाद के इनायतनगर में भी मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले एक मौलवी को पुलिस ने संदिग्ध बताकर उठा लिया जिसे घंटों थाने में रखा गया।

वहीं कानपुर से आईएस से जुड़े होने के आरोप में पकड़े गए इमरान और फैसल पुत्र मो0 नसीम से मिलने गए रिहाई मंच डेलिगेशन ने जब तकरीबन रात को साढ़े 9:15 बजे तिवारीपुर ताड़बगिया जाजमऊ स्थित उनके घर पहुंचकर दरवाजा खटखटाया तो किसी ने दरवाजा नहीं खोला। जिस पर वहां मौजूद लोगों ने रिहाई मंच डेलिगेशन को बताया कि एटीएस वालों ने घर के अंदर स्थानीय पुलिस को बैठा दिया है, जो घरवालों को न तो बाहर निकलने दे रहे हैं और ना किसी को अंदर जाने दे रहे हैं। इस पर जब रिहाई मंच अध्यक्ष एडवोकेट मो0 शुऐब ने इंस्पेक्टर चकेरी, सीओ कैंट, व एसएसपी कानपुर से फोन पर बातचीत की और उक्त परिवार के लोगों को उनकी इच्छा के विरूद्ध घर में कैद रखने का आरोप लगाते हुए उन्हें मुक्त कराने की मांग की तो तीनों अधिकारियों ने इसमें कुछ भी कर पाने में अपनी असमर्थता जता दी। जिसके बाद डेलिगेशन के सदस्य एखलाक हुसैन चिश्ती ने माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका मेल द्वारा प्रेषित की और परिवार को अविलम्ब मुक्त कराने की मांग की।

इस पूरे प्रकरण को एटीएस द्वारा ठाकुरगंज फर्जी मुठभेड़ से जुड़े तथ्यों को दबाने की आपराधिक साजिश करार देते हुए रिहाई मंच प्रवक्ता ने कहा कि एटीएस एक बार फिर आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों को मारने और फंसाने के घिनौने खेल को शुरू करने की फिराक में है जिसको कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि असीम अरूण दूसरा बृजलाल बनने की कोशिश ना करें जिन्होंने दजर्नों बेगुनाह मुस्लिम युवकों को आंतकवाद के फर्जी आरोपों में फंसा कर उनकी जिंदगियां बरबाद कर दीं और जिन्हें लम्बे कानूनी संघर्ष के बाद रिहाई मंच ने बरी बराया।

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