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झारखंड की राजधानी में रांची में 100 साल के इतिहास में पहली बार कोई महिला सदस्य बनी है. 32 साल की नाज़िया ने 2018 में झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश से हुए चुनाव में वोट दिया.

नाजिया ने मताधिकार पाने के लिए बाकयदा अंजुमन इस्लामिया के चुनाव संयोजक को आवेदन दिया था. ऐसे में नाजिया अंजुमन इस्लामिया के पदाधिकारियों (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव) और 12 कार्यकारी सदस्यों के चयन के लिए होने वाले चुनाव में मतदान करने वाली पहली महिला बन गयी हैं.

अंजुमन के सौ सालों के इतिहास में यह पहली दफ़ा हुआ है. दरअसल अब तक किसी भी महिला को अंजुमन का सदस्य नहीं बनाया गया था. इस अधिकार को पाने के लिए नाज़िया ने पूरे दस सालों की लड़ाई लड़ी है.

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नाज़िया तबस्सुम

बता दें कि कॉलेज के दिनों में छात्र नेता के तौर पर रांची विश्वविद्यालय में किसी मुस्लिम छात्रा के पहली बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है. सदस्यता को लेकर उनका कहना है कि मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी के रास्ते खुलें, पुरुष प्रधान समाज के ख्यालात बदलें. इस मक़सद से उन्होंने ये कदम उठाया.

नाजिया तबस्सुम ने राज्य महिला आयोग में याचिका दायर की थी, जिस पर तत्कालीन महिला आयोग की लक्ष्मी सिंह ने याचिकाकर्ता और अंजुमन पक्ष के बीच लंबी सुनवाई कर आदेश दिया कि अंजुमन इस्लामिया के बायलॉज में महिला सदस्य नहीं बन सकती, ऐसी कोई रोक नही है, इसलिए महिला को भी सदस्य बनाया जाए.

इसके अलावा उन्होंने इस मामले में राज्य अल्पसंख्यक आयोग में सुनवाई के लिए याचिका दायर की, जिसपर अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष शाहिद अख्तर ने वक्फ बोर्ड के सीईओ और अंजुमन के चुनाव संयोजक के बीच सुनवाई करते हुए नाजिया तबस्सुम को मताधिकार देने का निर्देश दिया.

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