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पूर्वी राजस्थान के करौली जिले में प्रस्तावित रामदेव के विवादित ड्रीम प्रोजेक्ट पर राजस्थान हाईकोर्ट ने रोक का आदेश जारी किया हुआ है। बावजूद प्रोजेक्ट से जुड़ी जमीन पर चारदीवारी और दरवाजा के निर्माण का काम किया जा रहा है। मानों राज्य में कानून का नहीं रामदेव का राज हो।

स्थानीय लोगों ने बताया कि वे मौके पर मौजूद पतंजलि ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को कई बार राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश दिखाकर निर्माण कार्य रोकने के बारे में कह चुके हैं, लेकिन उन्हे ही धमकाया-डराया जा रहा है।

याचिककर्ता रामकुमार सिंह का कहना है कि ‘हाईकोर्ट ने मेरी याचिका पर स्पष्ट आदेश दिया है कि श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी 729 बीघा विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाए, लेकिन बाबा रामदेव यहां बाउंड्री और गेट बनवा रहे हैं।’

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उन्होने बताया, ‘मैंने व्यक्तिगत रूप से कई बार मौके पर मौजूद पतंजलि ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को हाईकोर्ट का आदेश दिखाकर बाउंड्री और गेट का काम बंद करने के लिए कहा, लेकिन वे इसे रोकने के लिए तैयार होने की बजाय मुझे ही चुप रहने की हिदायत देते हुए धमकाते हैं। जो भी आपत्ति जताता है उसे डराया जाता है।’

रामकुमार सिंह ने कहा, यदि पतंजलि ट्रस्ट विवादित जमीन की चारदीवारी करने और दरवाजा बनाने में कामयाब हो जाता है तो यहां रहे 250 परिवारों को अपने ही घर आना-जाना बंद हो सकता है। ये मकान खसरा नंबर 415 और इसके आसपास बने हुए हैं, जो पतंजलि ट्रस्ट और श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट के बीच हुई लीज डीड में शामिल है।

वहीं पीड़ित केदार मीणा का कहना है कि  ‘बाबा बड़े आदमी हैं। मुख्यमंत्री उनके पैर छूती हैं। पुलिस और प्रशासन भी उनके साथ है। उनके लोगों ने खातेदार किसानों को वहां से भगा दिया। किसानों ने सब जगह शिकायत की मगर कहीं सुनवाई नहीं हुई। हमारे साथ भी यही होता दिख रहा है।’

गौरतलब है कि रामदेव के पतंजलि ट्रस्ट ने करौली के श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट से 11 अगस्त, 2016 को 401 बीघा जमीन तीन साल के लिए लीज पर ली थी। रामेदव यहां योगपीठ, गुरुकुल, आयुर्वेदिक अस्पताल, आयुर्वेदिक दवाइयों का उत्पादन केंद्र और गोशाला बनाना चाहते हैं। इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास 22 अप्रैल को बाबा रामदेव की मौजूदगी में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने किया था।

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