Wednesday, December 1, 2021

रामरहीम की हरकतें बचपन से ही थी गंदी, लड़की छेड़ने की वजह से स्कूल ने निकाला था

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पूत के पाँव पालने में ही दिखाई दे जाते है इस कहावत को बलात्कारी रामरहीम सिंह ने चरितार्थ किया है. दरअसल रामरहीम की बचपन से ही हरकते गंदी थी. जिसकी सज़ा उसे अब बुढ़ापे में मिली है.

लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करने के जुर्म में रामरहीम को बचपन में ही स्कूल के निकाल दिया गया था.ल के दिनों से ही लड़कियों को छेड़ना, आस-पास के लोगों को परेशान करना उसकी आदतों में शुमार था. लड़कियों के साथ छेड़खानी की वजह से नवीं क्लास में गुरमीत को स्कूल से निकाल भी दिया गया था. स्कूल से निकलने के बाद वह और आवारा हो गया था. जिसके चलते अगले साल 10वीं के बोर्ड एग्जाम में फेल हो भी हो गया था.

राम रहीम का जन्म राजस्थान के श्रीगंगानगर में 15 अगस्त 1967 को हुआ, वो अपने पिता मघर सिंह के साथ डेरे पर जाया करता था, जो डेरे के दूसरे गद्दीनशीन शाह सतनाम जी के शिष्य थे लेकिन शाह सतनाम जी ने राम रहीम को 23 साल की उम्र में डेरे की गद्दी सौंप दी थी.

जब बेपरवाह मस्ताना जी ने डेरे की नींव रखी थी, तब यहां सचमुच आध्यात्मिक माहौल हुआ करता था, वो अपने भक्तों को धर्म की सीख देते और सालों तक लगातार ध्यान योग सिखाते रहे, उनके शागिर्द शाह सतनाम जी भी उन्हीं के नक्शे-कदम पर रहे लेकिन यानी राम रहीम को चुनने के मामले में शाह सतनाम जी से ग़लती हो गई थी.

राम रहीम के आने के बाद आध्यात्म की जगह दुनियावी चकाचौंध, महंगी गाड़ियों, कपड़ों, ऐशो आराम की चीज़ों ने ले ली थी और आज अंत में डेरा भी कलंकित हो गया.

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