शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद की जगह पर राम मंदिर बनाने की वकालत करते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद बनी थी. ऐसे में शरीयत भी यह इजाजत नहीं देता कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई जाए.

मीर बाकी को शिया बताते हुए बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा कि मीर बाकी ने अयोध्या में वर्ष 1528-29 में मंदिर को तोडा थे. जिसके बाद बाबरी मस्जिद बनी थी. इसके प्रमाण पुरातत्व विभाग की खोदाई के दौरान भी मिले हैं. उन्होंने कहा कि मीर बाकी के इस कृत्य से शिया समुदाय शर्मिंदा है.

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उन्होंने कहा, हम फसाद नहीं चाहते हैं, लिहाजा हमने इस विवादित परिसर से अलग जमीन मांगी है ताकि वहां मस्जिद बनाई जा सके और भविष्य में भी कोई विवाद न हो. इस सबंध में ईरान व इराक के आयतुल्लाह से भी राय मांगी थी.

उन्होंने बताया, जनाब सैयद अली फातमी ने अलग जगह पर मस्जिद बनाने की राय दी है. जबकि जनाब आयतुल्लाह मकरीम शीराजी साहब ने इस मामले में लड़ाई, झगड़ा और विवाद से मना किया है. उन्होंने कानून के द्वारा या दोस्ताना माहौल में बातचीत कर मामला हल करने की सलाह दी है.

शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष बोले, अगर सुप्रीम कोर्ट ने हमारे सुझाव पर विचार किया और नई जगह मस्जिद बनी तो हम उसे मस्जिद-ए-अमन का नाम देंगे. मस्जिद का नाम बाबर या मीर बाकी के नाम पर नहीं रखा जाएगा.