उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने आने वाले शेक्षणिक सत्र के लिए परीक्षा फ़ीस में बेतहाशा बढ़ोतरी की है. जिसके चलते विरोध के स्वर उठना शुरू हो गए.

ध्यान रहे देश भर में मदरसों में बेहद ही गरीब परिवारों से ताल्लुक रखने वाले छात्र पढ़ते है. ऐसे में परीक्षा फ़ीस में ये बढ़ोतरी करना कतई जायज नही है. फीस के अभाव में ये छात्र शिक्षा से वंचित हो सकते है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक सभी छात्रों के लिए परीक्षा शुल्क महज़ 40 रुपये होता था. जिसे छात्र आसानी से भर शिक्षा हासिल कर रहे थे. लेकिन अब मुंशी, मौलवी यानि मदरसों में दसवें साल में पढ़ रहे रेग्युलर छात्रों को एग्ज़ाम फीस अब 150 और प्राइवेट करने वालों छात्रों को 500 रुपये जमा करनी होगी.

इसी तरह आलिम यानि इंटरमीडिएट के रेग्यूलर छात्रों की एग्ज़ाम फीस 300 और प्राइवेट छात्रों को 600 रुपये फीस देनी होगी. अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ये गरीब छात्र अचानक हुई इस बढ़ोतरी के चलते कैसे फीस जमा करा पायेंगे.

फीस बढ़ाने को लेकर उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के डिप्टी रजिस्ट्रार अख़लाक अहमद का कहना है कि राज्य में पहली बार मदरसों की फ़ीस बढ़ाई गई है और इतनी ज़्यादा इसलिए बढ़ाई गई है ताकि ‘बच्चों को पढ़ाई का महत्व पता चल सके.

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