चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को तलाक मामले पर एक अहम  फैसला सुनाते हुए कहा कि तलाक पर काजी की तरफ से जारी किये गये प्रमाण-पत्र की कोई कानूनी वैधता नहीं हैं. अदालत ने इस प्रमाण-पत्र को सिर्फ काजी की एक राय करार दिया हैं.

पूर्व विधायक बदर सैयद की जनहित याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया. चीफ जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमएम सुंद्रेश की पीठ ने काजी एक्ट, 1880 की धारा 4 का उल्लेख करते हुए कहा कि काजी का पद व्यक्ति को न्यायिक या प्रशासनिक अधिकार देने का नहीं है.
पूर्व एआईएडीएमके विधायक बद्र सईद ने मद्रास हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर काजी के द्वारा जारी किए जाने वाले सर्टिफिकेट को चुनौती दी थी. उन्होंने तर्क दिया कि इन प्रमाण पत्रों को मनमाने ढंग से बिना एक कानूनी ढांचे के जारी किया जाता है. सईद ने काजी द्वारा जारी किए जाने वाले ट्रिपल तलाक की मंजूरी को बंद करने की मांग की थी.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और शरीयत डिफेंस फोरम की ओर से पेश हुए वकील ने तर्क दिया कि चीफ काजी को शरीयत कानून में विशेषज्ञता होती है. ऐसे में वे ट्रिपल तलाक से संबंधित प्रमाण पत्र जारी कर रहे थे. हालांकि, ये प्रमाण पत्र ‘केवल राय के रूप में’ जारी किए गए थे. इसके समर्थन में उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरई) एप्लिकेशन एक्ट, 1937 की धारा दो का हवाला दिया.
वहीं कोर्ट ने रजिस्ट्रार को आदेश देते हुए कहा कि इस आदेश को स्पष्टता के लिए न्यायिक फोरम के पास भेजा जाए. मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी को होने वाली है.

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