नागपुर: शहर में आज नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी सीएबी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। तहरीक उलामा ए हिंद की स्थानीय इकाई ने जुमे की नमाज के बाद शहर के प्रमुख मस्जिद के बाहर यह प्रदर्शन आयोजित किया। मुख्य वक्ता के तौर पर इंजी अब्दुल सत्तार खान बरकाती ने कहा कि यह संशोधन विधेयक भारत को धार्मिक आधार पर बांटने की योजना है। यह कदम अंग्रेजों की इस हरकत से मिलता है जब वे भारत को बांट कर चले गए थे।

तहरीक की अध्यक्षता में बुलाए गए इस विरोध प्रदर्शन में जनता के बीच संबोधन में बरकाती ने कहा कि कैबिनेट से पास किया गया नागरिक संशोधन विधेयक देश को धर्म के आधार पर विभाजित कर देगा। यह भारत को कमजोर करेगा और संविधान के धर्म जाति एवं संप्रदाय के आधार पर लोगों के बीच अंतर नहीं करने की आत्मा के खिलाफ है।

प्रदर्शन के बाद उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए बरकाती ने अपने वक्तव्य में कहा कि कहाकि नागरिकता का आधार धर्म नहीं हो सकता लेकिन कैबिनेट से पास हुआ नागरिकता संशोधन विधेयक यानी सीएबी लोगों के बीच धर्म के आधार पर विभाजन पैदा कर रहा है। यह देश के धर्मनिरपेक्ष प्रकृति पर एक चोट है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुसलमानों को छोड़कर बाकी सभी धर्मों के लोगों के उत्पीड़ित नागरिकों को नागरिकता देने का यह प्रावधान दरअसल मुसलमानों को इस देश में दोयम दर्जे का नागरिक बनाने का प्रयास है।

तहरीक की तरफ से बुलाए गए इस जोरदार विरोध प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए बरकाती ने कहाकि यह भारत का इजराइलीकरण है और वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार देश के मुसलमानों को इजराइल की तर्ज पर डिटेंशन सेंटर के रूप में गजा जैसी खुली जेल में बंद करना चाहती है। उन्होंने कहा यह न सिर्फ भारत के संविधान बल्कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के भी विरुद्ध है, जिसमें किसी भी देश के नागरिक को उसके धर्म, जाति, क्षेत्र, लिंग या रंग के आधार पर उस से भेदभाव से रोकता है।

तहरीक ने यहां जारी एक प्रैस नोट में कहा कि ने बाहरी लोगों की समस्या से प्रभावित उत्तर पूर्व के राज्यों को इस में छोड़ दिया गया, जबकि घुसपैठियों का असली मसला उत्तर पूर्व से ही जुड़ा है। इसका मतलब यह है की नागरिकता संशोधन बिल किसी समस्या को हल करने के लिए नहीं बल्कि नई समस्या को पैदा करने के लिए लाया जा रहा है। तहरीक का आरोप है कि यह बिल संवैधानिक मान्यताओं के खिलाफ है और संसद को संविधान के खिलाफ धकेलने की नरेंद्र मोदी सरकार कोशिश कर रही है। दरअसल सीएबी हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना की और बढ़ना है। यह मूलत: मुस्लिम विरोधी है। तहरीक उलामा ए हिन्द मानता है कि सीएबी कानून नागरिकता रजिस्टर कानून के बाद छूट गए लोगों में सिर्फ मुसलमानों को घुसपैठिया घोषित करने की साजिश है। इस कानून के बाद भारत के पड़ोस में बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भी संबंध खराब होंगे और देश अलग-थलग पड़ जाएगा।

यह भारत के दुश्मन देश पाकिस्तान और चीन को मजबूत करेगा और अब देश के सामने एक नया सवाल है कि जिस कानून से हमारे दुश्मन देशों को लाभ पहुंचने की गुंजाइश हो वह कानून भारतीय जनता पार्टी की सरकार क्यों ला रही है? तहरीक ने सरकार से बेरोजगारी, महंगाई और बिगड़ती अर्थव्यवस्था की तरफ ध्यान देने की अपील की और ऐसे मुद्दों को छोड़कर देश को प्रगति पर ले जाने की नसीहत दी।

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