Monday, September 20, 2021

 

 

 

मांगों के साथ बुलेट ट्रेन के विरोध में आई गुजरात और महाराष्ट्र की जनता

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना के विरोध मे गुजरात के 15 गांवों के किसानों ने मौर्चा खोल दिया है। सोमवार को सूरत के 15 गांवों के करीब 200 किसानों ने जमीन अधिग्रहण के विरुद्ध जिलाधिकारी को एक मेमोरेंडम सौंपा है।

किसानों के अनुसार, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 21 गांवों की करीब 110 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिसका लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा है। किसानों की मांग है कि कानूनी तौर पर, जिस जमीन का अधिग्रहण किया जाना है, उसके मार्केट रेट जिलाधिकारी द्वारा किसानों को बताया जाना चाहिए, लेकिन सूरत के जिलाधिकारी ने अभी तक ऐसी कोई घोषणा नहीं की है।

किसानों ने सवाल उठाया कि जब सरकार दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर के लिए पहले ही काफी जमीन का अधिग्रहण कर चुकी है। साथ ही पश्चिमी रेलवे के पास भी बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट लायक जमीन है तो फिर अब उनकी जमीन का अधिग्रहण क्यों किया जा रहा है?

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वहीं महाराष्ट्र के पालघर जिले के गांववासियों ने भी बुलेट ट्रेन से पहले तालाब, एंबुलेंस सेवाएं, सौर उर्जा से चलने वाली स्ट्रीट लाइट और चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। एनएचआरसीएल को महाराष्ट्र के 23 गांवों में बहुत ज्यादा विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचआरसीएल) के प्रवक्ता धनंजय कुमार ने बताया , “हमने अपने रुख में बदलाव किया है. पहले हम गांवों के चौक पर गांव वालों को इकठ्ठा कर उन्होंने मनाने की कोशिश कर रहे थे कि परियोजना अच्छे काम के लिए है. पर यह काम नहीं आया, इसलिए हमने तय किया है कि अब हम सिर्फ जमींदारों के पास जाएंगे और गांव के मुखिया से लिखित में देने को कहेंगे कि वह जमीन के एवज में मुआवजे के अलावा और क्या चाहते हैं। ’’

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