जवाहरलाल विश्वविद्यालय (जेएनयू) मामले में गृह मंत्रालय की ओर से फरवरी के अंतिम दिनों में उठाए गए कदमों को असंवैधानिक एवं अलोकतांत्रिक बताते हुए प्रधान मंत्री  और राष्ट्रपति से हस्तक्षेप का अनुरोध करने वाली अधिवक्ता नाज़िया इलाही खान की याचिका पर कार्रवाई करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने गृह मंत्रालय के सचिव को इस पर कदम उठाने का निर्देश दिया है।

पीएमओ के विभागीय अधिकारी ब्रह्मु राम की ओर से २२ मार्च को गृह मंत्रालय के सचिव को पत्र भेजकर कहा गया है कि अधिवक्ता नाज़िया इलाही खान की याचिका पर उचित कार्रवाई के लिए उन्हें सौंपी जा रही है वह  उस पर अनुकूलन कदम उठाएं और इसके परिणाम से पक्षों को सूचित करते रहें।प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पत्र की प्रतिलिपि अधिवक्ता नाज़िया इलाही खान को भी भेजी है।

ज्ञातः  रहे कि फोरम फार आरटी ​​आई एक्ट  एंड एंटी करप्शन की प्रमुख एवं प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ता नाज़िया इलाही खान ने इस मामले में पिछले २९ फरवरी को कोल्कता महानगर के व्यस्तम चौराहे मौला अली क्रॉसिंग पर अपने हजारों कार्यकर्ताओं के साथ केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह का पुतला दहन कर के विरुद्ध वयक्त किया थ।  इसके साथ ही उन्होंने एक याचिका भी सर्वशक्तिमान अधिकारियों को भेजी थी जिसमें कहा था कि जेएनयू में छात्रों के साथ हुई कार्रवाई असंवैधानिक एवं  लोकतंत्र विरोधी है, विरोध और आलोचना करने वाले छात्रों के विरुद्ध संगदिलना कार्रवाई करके गृह मंत्रालय ने लोकतंत्र का गाला घोंटा है और विरोधियों का गला दबाने की कोशिश की है।

याचिका मैं कहा गया था के सरकार की सरपरस्ती में लोकतान्त्रिक भारत मैं हिंदुत्व को थोपने की कोशिश की जा रही है अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ए आई वी पी) जैसी संगठन शैक्षिक संस्थानों पर अपनी विचारधारा थोप रही हैं जिसके विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए और हर जगह कानून शासन सुनिश्चित बनाई जाए ताकि कोई चरमपंथी अपनी मनमानी ना कर सके और छात्र-छात्राओं के जीवन से खिलवाड़ ना करे।

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