ईद की नमाज के लिए उत्तर प्रदेश में मस्जिदों व ईदगाहों को एक घंटे खोलने के लिए दाखिल की गई अर्जी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सीधे तौर पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। इस याचिका में कोर्ट से मांग की गई थी ईद के दिन एक घंटे के लिये मस्जिदों और ईदगाह पर नमाज पढ़ने की इजाजत दी जाये।

शाहिद अली की अर्जी पर हाई कोर्ट ने सीधे दखल देने से इंकार करते हुए कहा कि इस मसले पर पहले राज्य सरकार से अनुरोध किया जाए। यदि, सरकार की ओर से अनुरोध खारिज होता है या फिर अर्जी पेंडिंग रहती है तब हाई कोर्ट में अर्जी डाली जाए।  इस तरह सीधे हाई कोर्ट आना ठीक नहीं है।

बुधवार को याचिका पर चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा की बेंच ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ईद के दिन मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ना जरूरी होता है। अगर ऐसा न किया जाए तो इबादत पूरी नहीं होती है।

अर्जी में यह भी कहा गया कि ईद की दिन नमाज के लिए उत्तर प्रदेश के ईदगाह और मस्जिद नमाज के लिए एक घंटे खोलने की अनुमति दी जाए। इसके अलावा इसमें यह भी मांग की गई कि जून महीने तक जुमे के नमाज (शुक्रवार) के लिए मस्जिद एक घंटे खोलने की भी इजाजद दें।

दिल्ली सरकार से भी मांग

ईद पर सार्वजनिक रूप से नमाज अदा करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक पत्र लिखा गया है। ये पत्र यूनाइटेड मुस्लिम फ्रंट की तरफ से शाहिद अली ने मुख्यमंत्री को भेजा है। इस पत्र में कहा गया है कि जब शराब की दुकानें खोली जा सकती हैं और सभी बाजार खोले जा सकते हैं, तो जाहिर है कि कुछ शर्तों के साथ ईद की विशेष नमाज के लिए भी अनुमति दी जा सकती है।

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