देश के अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के खिलाफ इस्लामोफोबिया के माहौल के निर्माण में सरकारी कर्मचारी भी पीछे नहीं है. सरकारी मशीनरी भी मदरसों के छात्रों को बिना किसी सबूत के आतंकी साबित करने पर तुली हुई है.

ताजा मामला दरगाह आला हजरत से जुड़े मदरसें का है. जब मदरसे के छात्र पासपोर्ट ऑफिस में वेरिफिकेशन के लिए पहुंचे तो कार्यालय के अधिकारियों ने छात्रों से सवाल किया कि आतंकवादी तो नहीं हो.

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इस सबंध में दरगाह आला हजरत के प्रवक्ता मुफ्ती मुहम्मद सलीम नूरी ने प्रधानमंत्री को भेजे शिकायत पत्र में कहा है कि मदरसा बोर्ड की मार्कशीट के छात्रों के साथ पासपोर्ट कार्यालय के कर्मचारी व अधिकारी अभद्र व्यवहार कर रहे हैं. इतना ही नहीं उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान कर रहे हैं. पासपोर्ट की वेबसाइट में दर्शाए गए प्रपत्रों से अलग से गैर जरूरी कागजात मांगे जा रहे हैं.

नूरी ने कहा कि 1995 में उत्तर प्रदेश सरकार ने आलिम परीक्षा को इंटरमीडिएट, मौलवी व मुंशी परीक्षा को हाई स्कूल परीक्षा के समकक्ष घोषित किया था. मुंशी, मौलवी की मार्कशीट लेकर जब मदरसे के छात्र पासपोर्ट बनवाने जा रहे हैं तो वहां का स्टाफ उनके साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं. अभद्र भाषा बोलकर मार्कशीट को फर्जी बता रहे हैं. यही नहीं मार्कशीट छात्रों के ऊपर फेंक रहे हैं.

उन्होंने कहा, बहुत से छात्रों से प्रवेश पत्र, टीसी आदि कागजात मांगते है, जो पासपोर्ट की वेबसाइट पर किए गए प्रपत्रों से अलग हैं. दूसरे जिलों से आने वाले छात्र पासपोर्ट बनवाने के लिए कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं.