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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में जूनियर डॉक्टरों और यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच हुए विवाद के बाद हॉस्टल को खाली करा लिया गया था। इन हॉस्टल को दोबारा भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हालांकि इस बार नए नियमों के साथ ये प्रक्रिया शुरू की गई।

जानकारी के अनुसार अन्य छात्रों को अपने चरित्र प्रमाण पत्र (कैरेक्टर सर्टिफिकेट) के साथ-साथ माता-पिता का कैरेक्टर सर्टिफिकेट भी सौंपना होगा। बीएचयू प्रशासन के इस नए नियम से छात्रों में रोष है। इसके अलावा आरोपी 13 छात्रों को हॉस्टल एलॉट नहीं किया जाएगा।

इन 13 छात्रों में डॉ विजय शंकर, डॉ रवि रंजन, डॉ शिल्पी रॉय, डॉ आफरीन अली, डॉ रीतेश कुमार, डॉ विश्वजीत, अभिनव पांडेय, श्रीप्रकाश सिंह, विक्रांत शेखर सिंह, सुमित कुमार सिंह, अनुपम कुमार, नीतीश सिंह और मृत्युंजय तिवारी शामिल हैं।

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बता दें कि सर सुंदरलाल अस्पताल में सोमवार रात एक मरीज के परिवार और जूनियर डॉक्टरों के बीच कथित हंगामे और मारपीट के बाद हॉस्टल को खाली कराया गया था। इस साल अप्रैल से अब तक बीएचयू 11 बार सुलग चुका है। जिसमें पांच बार तो सितंबर के महीने में ही माहौल हिंसक हो गया।

मामले में एसएसपी आनंद कुलकर्णी का कहना है कि छात्रों के मसले पर पुलिस का बार-बार हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। आखिर वो छात्र हैं और अपना भविष्य बनाने के लिए यहां आए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की गई है कि हॉस्टल के वार्डन के माध्यम से सकारात्मक माहौल बनाएं।

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