ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष व हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को योगी सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खानों को लेकर की जा रही कारवाई का मुद्दा लोकसभा में उठाया.

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार सच में भैंस के मीट के एक्सपोर्ट को प्रमोट करना चाहती या फिर इस पर बैन लगाना चाहती? क्योंकि यूपी में जो वर्तमान माहौल हैं, उसमें कई भैंस के मीट की एक्सपोर्ट यूनिटों को बंद किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि यह पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार की गलती है कि उसने बूचड़खानों को नियमित नहीं किया. सरकार को उन्हें बंद करने की बजाय नियमित किए जाने के लिए समय देना चाहिए.

ओवैसी ने कहा, “यदि सरकार काला धन जमा रखने वालों को अपनी संपत्ति घोषित करने और उसे वैध बनाने का समय दे सकती है, तो फिर बूचड़खानों को नियमित करने के लिए समय क्यों नहीं दिया जा सकता? इसका अर्थ यह है कि वे किसी खास समुदाय को निशाना बना रहे हैं.” ओवैसी ने कहा कि भारत से भैंस के मांस के निर्यात का कारोबार 26,000 करोड़ रुपये का है और आधी से भी ज्यादा निर्यात इकाइयां उत्तर प्रदेश में हैं.

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ओवैसी ने कहा, “सरकार के इन कदमों से आर्थिक समस्याएं पैदा होंगी. क्या सरकार इन निर्यातों को रोकना चाहती है? यदि ऐसा होता है तो पांच से 10 लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे.” इसी के साथ उन्होंने सवाल किया कि सरकार को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि किसी को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वैध बूचड़खानों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि मांगों की पूर्ति की जा सके.

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