Tuesday, October 26, 2021

 

 

 

हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक भारत सरकार पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) विधेयक को पारित नहीं कर देती

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बलरामपुर यूपी – रविवार, 8 अगस्त को दारुल उलूम अहल-ए-सुन्नत बहर-उल-उलूम पापड़ी कोल्हावी पोस्ट दारी चोरा जिला बलरामपुर यूपी में उलेमा-ए-अहल-ए-सुन्नत और इमामों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

इस दौरान मुंबई से रज़ा एकेडमी के प्रवक्ता हज़रत मौलाना मुहम्मद अब्बास रिज़वी ने बड़ी संख्या में सुन्नी विद्वानों को  अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी का संदेश पढ़कर सुनाया। जिसमे उन्होंने कहा कि हम जागरूकता अभियान फैलाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं। तहफीज-ए-नमूस रिसालत बोर्ड के गठन के बाद से अलहज मुहम्मद सईद नूरी साहिब देश के विभिन्न शहरों और प्रांतों का दौरा कर चुके हैं। यह यात्रा तब जारी रहेगी जब तक यह बिल संसद से पास नहीं होगा।

इस महत्वपूर्ण बैठक में अल्लामा इरफ़ान रज़ा मुशाहिदी ने अपने बयान में कहा कि पैगंबर के सम्मान की रक्षा हर मुसलमान का दायित्व है और इसके बिना कोई भी मुसलमान अपनी आस्था की कल्पना नहीं कर सकता। यह इस्लाम के लोगों की जीवन भर की जमा पूंजी है जो अंधेरे में भी चमकती है। मुसलमानों ने दुनिया के सामने वैज्ञानिक, व्यावहारिक, आर्थिक, राज्य, बौद्धिक और तकनीकी कामयाबी पेश की हैं। लेकिन इस्लाम और पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) का अपमान कर मुसलमानों के दिलों को चोट पहुंचाई जा रही है। ऐसे लोगों से निपटने के लिए अल्हाज सईद नूरी ने तहरीक-ए-नमूस रिसालत छेड़ी है। जिसके लिए वे बधाई के पात्र है।

उन्होने आगे कहा, नूरी साहब अपनी बढ़ती उम्र के बावजूद भी पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) बिल को पारित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और देश के अधिकांश हिस्सों का दौरा कर रहे हैं। हम उनके साहस के लिए बधाई देते है और आप सभी से उनके संघर्ष का हिस्सा बनने का आग्रह करते हैं। प्रांतीय सरकारों के साथ केंद्र सरकार और भारत सरकार से अपील करते हैं कि हमारे इस कानून की मांग को जल्द से जल्द लागू किया जाए।

इस महत्वपूर्ण अधिवेशन में मदरसा के अध्यक्ष अल्लामा इरफान रजा शाहिदी, अल्लामा मुफ्ती अब्दुल सलाम, कारी बदीउद्दीन मुशाहीदी, मौलाना अब्दुल मनान रिजवी, मौलाना मजहर अली, मौलाना सलामुद्दीन, सूफी जलालुद्दीन, कारी नजीब-उद-दीन, मौलाना कमाल-उद-दीन, हाफिज शाह रजा, कारी गयास मौलाना, मौलाना अता-उल-मुस्तफा, मौलाना अनबर रजाम शाहिदी, मौलाना मेराज आलम, सूफी जमां मुशाहिदी आदि मौजूद थे।

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