मुस्लिम स्टूडेंट आर्गेनाईजेशन ऑफ़ इंडिया की एएमयू यूनिट के तत्वाधान में वार्षिक ‘अज़मत-ए-रसूल कांफ्रेंस’ शनिवार रात को कैनेडी हाल में आयोजित की गई.

दिल्ली से आये फुलाह रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष ‘इजी’ फजलुल्लाह चिश्ती ने पैग़म्बर-ए-इस्लाम की शान बयान की. उन्होंने बताया कि आप की शान और तारीफ़ अल्लाह खुद बयान करता हैं. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही अल्लाह इंसानों को भी आपकी तारीफ़ बयान करने का हुक्म देता हैं.

उन्होंने आगे बताया, आप नबी-ए-करीम (सल्ल.) ने पूरी जिंदगी इंसानों को गुमराही की अँधेरे से निकालकर हक़ का रास्ता दिखाया. आप ने पड़ोसी, रिश्तेदार, दोस्त, महिला, बच्चों, यतीमों, गरीबों, विधवाओं और बेसहारों को ख़ास अधिकार अता किये और शादी से लेकर जंग तक के उसूल बयान फरमाए.

जामिया हमदर्द दिल्ली से डॉ मुहम्मद अहमद नईमी ने बताया कि इस्लाम हजरत आदम अलेहिस्सलाम के जमाने से ही हिन्दुस्तान में आ गया. इस प्रकार हिन्दुस्तान इस्लाम का जन्मस्थान बना. उन्होंने कहा, हिन्दुस्तान के सभी धर्मों में नबी-ए-करीम (सल्ल.) की शान बयान की गई हैं. इसी के साथ उन्होंने कहा कि हमे एकता स्थापित करने के लिए सभी धर्मों के बारें में जानना चाहिए और आपस में मुहब्बत स्थापित करनी चाहिए.

कांफ्रेंस की अध्यक्षता करते हुए डॉ सैय्यद अमीन मिया कादरी साहब ने नौजवानों से अपील करते हुए कहा कि तालीम ही हर समस्या का हल हैं. और तालीम हासिल करके ही अपना हक़ हासिल किया जा सकता हैं.

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