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कथित गौरक्षा के नाम पर राजस्थान के अलवर में मारे गए उमर का शव सात दिन बाद उसके गाँव घाटमिका में दफना दिया गया. हालांकि मुस्लिम समुदाय ने अब वसुंधरा सरकार को सभी आरोपियों को 5 दिनों में गिरफ्तार करने का अल्टीमेटम दिया है.

ध्यान रहे आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग, 50 लाख का मुआवजा और आश्रित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग पर परिजनों सहित पूरा मुस्लिम समुदाय ने शव लेने और शव के पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया था. हालांकि मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद शव को दफनाया गया.

दरअसल मानवाधिकार आयोग ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए शव का तत्काल पोस्टमार्टम करवा कर प्रशासन को अंतिम संस्कार कराने का निर्देश दिया था. आयोग ने कहा कि मानव शव के भी अधिकार होते हैं. शव किसी व्यक्ति के उत्तराधिकार में या संपत्ति के रूप में प्राप्त नहीं हो सकते. किसी को अधिकार नहीं कि अंतिम संस्कार नहीं किया जाए.शव को बंधक रखकर किसी मांग की पूर्ति का जरिया भी नहीं बनाया जा सकता.

जिसके बाद पुलिस ने रिजनों से समझाइश की. परिजनों को बताया कि इस प्रकरण में दो जनों को गिरफ्तार किया जा चुका है. पोस्टमार्टम कराए बिना पुलिस को सबूत नहीं मिलेंगे और इसका फायदा आरोपियों को हो सकता है.

उल्लेखनीय है कि 9 नवम्बर की देर रात अलवर जिले से भरतपुर स्थित अपने गांव से एक पिकअप में गाय लेकर जा रहे उमर, ताहिर और जावेद की भगवान सिंह और रामवीर सहित 6 गौरक्षकों ने मारपीट की थी. साथ ही उमर की गोली मारकर हत्या कर दी थी. और उसके शव को पटरियों पर फेंक दिया था.

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