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राजस्थान के अलवर में कथित गौरक्षा के नाम पर मारे गए उमरके शव को 6 दिनों के बाद परिजनों ने जिद छोड़ते हुए ले लिया है. अपनी मांगों को लेकर परिजनों ने शव को लेने साथ ही पोस्टमार्टम कराने से भी इंकार कर दिया था. बुधवार को शव का पोस्टमार्टम कराकर आज उमर को सुपुद्र ए ख़ाक कर दिया गया.

दरअसल मानवाधिकार आयोग ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए शव का तत्काल पोस्टमार्टम करवा कर प्रशासन को अंतिम संस्कार कराने का निर्देश दिया था.  आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने इस सबंध में अलवर जिला पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट भी मांगी है.

मानवाधिकार आयोग ने कहा कि मानव शव के भी अधिकार होते हैं. शव किसी व्यक्ति के उत्तराधिकार में या संपत्ति के रूप में प्राप्त नहीं हो सकते. किसी को अधिकार नहीं कि अंतिम संस्कार नहीं किया जाए.शव को बंधक रखकर किसी मांग की पूर्ति का जरिया भी नहीं बनाया जा सकता.

जिसके बाद पुलिस ने रिजनों से समझाइश की. परिजनों को बताया कि इस प्रकरण में दो जनों को गिरफ्तार किया जा चुका है. पोस्टमार्टम कराए बिना पुलिस को सबूत नहीं मिलेंगे और इसका फायदा आरोपियों को हो सकता है.

उल्लेखनीय है कि 9 नवम्बर की देर रात अलवर जिले से भरतपुर स्थित अपने गांव से एक पिकअप में गाय लेकर जा रहे उमर, ताहिर और जावेद को कथित गौ रक्षकों ने रोक कर मारपीट की थी. साथ ही उमर की गोली मारकर हत्या कर दी थी. और उसके शव को पटरियों पर फेंक दिया था.

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